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Saubhagya Bharat News

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शनिवार, 29 नवंबर 2025

सारंडा में आईईडी ब्लास्ट: 18 वर्षीय युवती की मौत, दो महिलाएँ गंभीर रूप से घायल

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड के सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट से कोलभोंगा गांव की फूलों धनवार (18) की मौत हो गई है। वहीं सलामी कुंडलना (28) और बरसी धनवार (35) गंभीर रूप से घायल हो गई हैं। घटना जराईकेला थाना क्षेत्र के कोलबोंगा गांव के पास जंगल में शुक्रवार को हुई, जब महिलाएं सियाल पत्ता तोड़ने गई थीं। मृतक महिला की पहचान कोलबोंगा निवासी फूलों धनवार के रूप में हुई है। विस्फोट इतना जोरदार था कि फूलों धनवार की मौके पर ही मौत हो गई। दो अन्य घायल महिलाओं को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। जराईकेला थाना पुलिस और स्थानीय सुरक्षा बल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया तथा इलाके को सील कर दिया। एसपी अमित रेणु ने बताया कि नक्सलियों की यह कायराना हरकत आम ग्रामीणों के लिए खतरा बन रही है। सघन सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। सारंडा जंगल लंबे समय से नक्सलियों का गढ़ रहा है। यहां पिछले कुछ महीनों में कई आईईडी विस्फोट हो चुके हैं, जिनमें सुरक्षा बलों के जवान और ग्रामीण प्रभावित हुए। नक्सली सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए जंगल में विस्फोटक बिछा रहे हैं, लेकिन निर्दोष लोग चपेट में आ रहे हैं।ग्रामीणों में घटना से रोष व्याप्त है। उन्होंने प्रशासन से जंगल में सुरक्षा बढ़ाने और नक्सल उन्मूलन अभियान तेज करने की मांग की है। पुलिस ने नक्सलियों की तलाश तेज कर दी है।




आदित्यपुर : मेडिनोवा नर्सिंग होम ने बचाई जुड़वा सतमासे बच्चों की जान, 960 ग्राम का नवजात हुआ डिस्चार्ज

मेडिनोवा नर्सिंग होम ने एक बार फिर नवजात चिकित्सा क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट क्षमता का परिचय दिया है। 30 सितंबर को टीएमएच में एक महिला कविता महतो (रायडीह, सरायकेला) ने 700-700 ग्राम के दो सतमासे जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था, जो कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त थे। टीएमएच ने दोनों नवजातों को 6 अक्टूबर 2025 को बेहतर उपचार के लिए मेडिनोवा नर्सिंग होम रेफर किया था।

हॉस्पिटल के एनआईसीयू में गहन देखरेख के बाद एक बच्ची को एक माह के भीतर 1 किलो 100 ग्राम वजन होने पर स्वस्थ घोषित कर छुट्टी दे दी गई थी। वहीं, आज दूसरे नवजात (700 ग्राम वजन वाला लड़का) को भी 54 दिनों के बाद सफल उपचार उपरांत डिस्चार्ज कर दिया गया। उसका वजन अब बढ़कर 960 ग्राम हो चुका है और डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह स्वस्थ बताया है।




दोनों बच्चों का इलाज प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क किया गया। पिछले 3 महीनों में मेडिनोवा नर्सिंग होम में विभिन्न अस्पतालों से 200 नवजात रेफर होकर आए, जिनमें से 184 बच्चों को सफलतापूर्वक बचाया गया, जबकि 16 नवजातों को नहीं बचाया जा सका।

मेडिनोवा नर्सिंग होम 2018 से संचालित एनआईसीयू के साथ कोल्हान का सबसे विश्वसनीय आयुष्मान भारत केंद्र बन गया है। नर्सिंग होम में डॉ. राजेश कुमार, डॉ. पूजा अग्रवाल और डॉ. रश्मि वर्मा के द्वारा लगातार सफल इलाज किए जा रहे हैं। यहां टीएमएच, एमजीएम, मर्सी अस्पताल, सरायकेला व चाईबासा सदर अस्पताल, गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित पूरे कोल्हान से जटिल स्थिति वाले नवजात बेहतर उपचार हेतु लाए जा रहे हैं।

एनआईसीयू उपचार खर्च आमतौर पर काफी महंगा होता है, लेकिन आयुष्मान योजना के तहत यहां गरीब परिवारों को अत्यधिक राहत मिल रही है।

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