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Saubhagya Bharat News

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सोमवार, 5 जनवरी 2026

प्रयागराज: शुरू हो गया मिनी कुंभ, प्रयागराज में 1 महीने डेरा डालकर लोग क्‍यों करते हैं कल्‍पवास?

प्रयागराज में विश्‍वप्रसिद्ध माघ मेला शुरू हो चुका है. यहां गंगा, यमुना और सरस्‍वती के त्रिवेणी संगम पर डेढ़ महीने तक मेला चलेगा, जिसे मिनी कुंभ कहते हैं क्‍योंकि इसमें देश-दुनिया से लाखों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं. साथ ही एक महीने का कल्‍पवास भी करते हैं. संगम की रेती पर आध्‍यात्मिक उन्‍नति पाने, पाप नष्‍ट करके मोक्ष की राह पर चलने के लिए लाखों लोग हर साल माघ मेले में आते हैं.



इस साल भी 3 जनवरी 2026 से प्रयागराज में माघ मेला शुरू हो गया है, जिसे मिनी कुंभ कहते हैं. इसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं. त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाते हैं. जप-तप, साधना और दान-पुण्‍य करते हैं. इन श्रद्धालुओं में कल्‍पवासी भी होते हैं जो संगम की रेती पर पूरा एक महीना भगवान की भक्ति में बिताते हैं और कड़े नियमों का पालन करते हैं. कई लोग 12 वर्ष तक कल्‍पवास करने का संकल्‍प भी लेते हैं. यानी कि 12 साल तक हर बार माघ मेले के दौरान संगम पर एक महीने का कल्‍पवास करते हैं. यह बेहद कठिन व्रत होता है.

शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

प्रयागराज:3 जनवरी से प्रयागराज में माघ मेला, शाही स्नान की तिथियां तय - जानिए धार्मिक महत्व और पूरी जानकारी

प्रयागराज: नववर्ष की शुरुआत के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज में आस्था का सबसे बड़ा आयोजन माघ मेला शुरू होने जा रहा है। इस वर्ष माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 (पौष पूर्णिमा) से होगी और यह 15 फरवरी 2026, महाशिवरात्रि तक चलेगा। मेले को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है, वहीं प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं।


हर वर्ष माघ मास में आयोजित होने वाला यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, तपस्या, दान और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार माघ मास अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इस दौरान संगम में स्नान, दान और कल्पवास करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण और मत्स्य पुराण में भी माघ मेले का विशेष उल्लेख मिलता है।

देवताओं के स्नान की मान्यता: धार्मिक मान्यता है कि माघ मेले के दौरान देवता भी पृथ्वी पर आकर संगम में स्नान करते हैं। इसी कारण इस अवधि को कल्पवास का सर्वोत्तम समय माना जाता है। माघ मेला को कुंभ मेले का लघु रूप भी कहा जाता है। जिन वर्षों में कुंभ या अर्धकुंभ नहीं होता, उन वर्षों में भी माघ मेले का आयोजन अनिवार्य रूप से किया जाता है।

शाही स्नान का विशेष महत्व: गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर लगने वाले माघ मेले का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण आयोजन शाही स्नान होता है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु पुण्य लाभ के लिए संगम में आस्था की डुबकी लगाते हैं।

शाही स्नान के दिन अखाड़ों के साधु-संत, नागा संन्यासी और महंत पारंपरिक शोभायात्रा के साथ संगम तट पर पहुंचते हैं। शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच होने वाला यह स्नान अत्यंत दिव्य और भव्य माना जाता है। शाही स्नान के बाद ही आम श्रद्धालुओं को स्नान की अनुमति मिलती है।

माघ मेले के प्रमुख स्नान पर्व

3 जनवरी 2026 – पौष पूर्णिमा (मेला व कल्पवास आरंभ)

14 जनवरी 2026 – मकर संक्रांति (शाही स्नान)

18 जनवरी 2026 – मौनी अमावस्या (शाही स्नान)

23 जनवरी 2026 – बसंत पंचमी (शाही स्नान)

1 फरवरी 2026 – माघी पूर्णिमा

15 फरवरी 2026 – महाशिवरात्रि (अंतिम स्नान व मेले का समापन)

माघ मेला श्रद्धा, साधना और सनातन संस्कृति का ऐसा संगम है, जहां हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु आकर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं और भारत की आध्यात्मिक विरासत को सजीव अनुभव करते हैं।

रविवार, 16 नवंबर 2025

प्रयागराज: माघ मेला में भी लागू होगा महाकुंभ मॉडल; भीड़ बढ़ने पर खुशरोबाग बनेगा होल्डिंग एरिया, रेलवे–जिला प्रशासन की समन्वय बैठक में महत्वपूर्ण सुझाव

महाकुम्भ 2025 का* *प्लान इस बार माघ मेला में भी लागू किया जाएगा ताकि क्राउड मैनेजमेंट में आसानी हो। माघ मेला के* *प्रमुख स्नान पर्वों पर अगर श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा बढ़ती है तो महाकुम्भ की तर्ज पर रेलवे प्रशासन* *खुशरोबाग का भी होल्डिंग एरिया के रूप में प्रयोग करेगा



इसके अलावा संगम आने-जाने के लिए भी भीड़ बढ़ने पर नखास कोहना, चौक, पुरानी जीटी रोड का इस्तेमाल किया जा सकता है। मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में माघ मेला को लेकर रेलवे और जिला प्रशासन के अफसरों की समन्वय बैठक में इन सभी सुझावों पर चर्चा हुई। एनसीआर के प्रयागराज डीआरएम कार्यालय स्थित संकल्प सभागार में आयोजित बैठक में डीआरएम रजनीश अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में माघ मेले की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा हुई

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल एवं जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की उपस्थिति में एडीआरएम दीपक कुमार ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से शहर के सभी स्टेशनों की यात्री क्षमता एवं होल्डिंग एरिया के बारे में बताया। उन्होंने मेला स्पेशल ट्रेनों की जानकारी भी दी। कहा कि अधिकांश मेला स्पेशल *ऑन डिमांड चलाई जाएगी। यह भी बताया प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान प्रयागराज जंक्शन पर एकल दिशा प्रवेश होगा। इस दौरान सिटी साइड से ही यात्रियों को प्रवेश दिया जाएगा जबकि यात्रियों की निकासी सिविल लाइंस साइड से होगी। यात्रियों को सिविल लाइंस साइड से प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अगर मेला अवधि के सामान्य दिवसों में भी भीड़ बढ़ती है तब भी एकल दिशा प्रवेश और निकासी लागू की जा सकती है। इस दौरान प्रयागराज जंक्शन, सूबेदारगंज, नैनी, प्रयागराज छिवकी, प्रयागराज रामबाग, झूंसी *एवं फाफामऊ स्टेशनों से श्रद्धालुओं के संगम क्षेत्र तक आगमन एवं प्रस्थान के सभी मुख्य एवं वैकल्पिक मार्गों पर भी विचार-विमर्श किया गया










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