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Saubhagya Bharat News

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रविवार, 19 अक्टूबर 2025

महालिमोरूप:बंदना पर्व को लेकर महालिमोरूप क्षेत्रीय गाँव के ग्रामीण काफी उत्साहित कल होगी गठ पूजा

महालिमोरूप:दीपावली व काली पूजा के साथ ही झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में बंदना पर्व की धूम मच जाती है।

इस अवसर पर महालिमोरूप क्षेत्र के झारखंडी समाज के लोग बैलों की पूजा करते हैं। बंदना पर्व को लेकर महालिमोरूप क्षेत्रीय गाँव के ग्रामीण अपने घर-आंगन की साफ सफाई कर रंग-बिरंगी मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से रंगाई करने में लग गए है। 

कार्तिक माह के अमावस्या से तीन दिन पूर्व से ही अपने घर के पशु जैसे गाय, बैल, भैंस आदि के सींग में तेल लगाया जाता है और उन्हेंं सजाया जाता है। बांदना पर्व के पहले दिन यानी आमावस्या के दिन शाम को देहुरी गोधुली बेला में गठान टांड़ यानी जहां गांव के गाय-बैलों को एकत्र कर रखा जाता है, वहां जाते हैं। देहरी दिन भर निर्जल उपवास रहकर गठ पूजा करते हैं। गठ पूजा के बाद जिसकी गाय या बैल पूजा किए गए अंडे को फोड़ता है, उसका विशेष सम्मान किया जाता है। रात को उसी के घर से धिंगवानी का शुभारंभ होता है। रात भर ढोल, धमसा, मांदल के थाप पर अहिरा गाते हुए घर-घर जाकर गाय-बैल को जगाया जाता है। 

गोहाल पूजा बांधना परब का अभिन्न हिस्सा है। इस दिन घर का एक पुरुष व एक महिला उपवास रहते हैं। घर-आंगन की साफ-सफाई के बाद महिलाएं चावल का गुड़ी कुटती हैं। फिर अलग से चूल्हा बनाकर उसे गाय के दूध से मिलाकर पीठा छांकती हैं। किसान घर के खेती-बाड़ी में प्रयोग होने वाले औजारों की पूजा घर के बाहर तुलसी ढीपा में की जाती है।

इसके बाद गोहाल यानी गोशाला में पूजा की जाती है। इस दौरान मुर्गा की बलि दी जाती है। इसके बाद चावल के गुड़ी को घोल कर चौक पूरा जाता है। इसमें सबसे पहले चौक के शीर्ष भाग में गोबर रखा जाता है। उसके ऊपर एक सोहराय घास देकर सिंदूर का टीका दिया जाता है। इसके बाद एक बछिया से उसे लंघवाया जाता है।

बांदना पर्व के दौरान पशुधन के अलावा कृषि यंत्रों को धान का मोड़ यानी मुकुट पहनाया जाता है। धान की बाली से बने मोड़ पहनाने के पीछे का उद्देश्य होता है कि जिस अनाज को जिन गाय-बैल व कृषि यंत्रों की बदौलत उपजाया गया है, उसे सबसे पहले उसी के सिर पर चढ़ा कर उन्हें समर्पित किया जाता है। शाम में घर के सभी गाय, बैल व भैंस के सींग पर तेल लगाया जाता है। महिलाएं उसे चुमान बंदन करती हैं।

बांदना परब के दौरान गोरुखूंटा के दिन घर आंगन की लीपापोती कर कुल्ही यानी गांव की सड़क से लेकर संपूर्ण आंगन में चौक पूरा जाता है यानी चावल के आटे की घोल से अल्पना बनाया जाता है। घर के सभी गाय, बैल, भैंस के लिए मोड़ बनाया जाता है। इस दिन भी पैर धोकर सभी गाय, बैल, भैंस आदि को तेल-सिंदूर देकर चुमान बंदन किया जाता है। फिर उसे खूंटा से बांधकर नचाया जाता है।

इसे ही गोरू खूंटान कहा जाता है। पारंपरिक बांदना व सोहराई गीतों के साथ लोग आकर्षक रूप से सजाए गए बैल व भैंसों को ढोल नगाड़ों की थाप पर नचाते हैं। इस दौरान सोहराय गीत गाकर ढोल नगाड़ा मांदर के साथ चमड़ा लेकर उसे आत्मरक्षा का गुण भी सिखाया जाता है, ताकि जंगल में हिंसक जानवरों से अपनी और अपने दल का रक्षा कर सके। इस दिन घर के मालिक और मालकिन उपवास पर रहते हैं।







मंगलवार, 7 अक्टूबर 2025

महालिमोरूप में लक्ष्मी पूजा के अवसर पर हुई संगीत संध्या, झूमे लोग

सरायकेला प्रखण्ड अन्तर्गत महालिमोरूप गाँव के श्री श्री सार्वजनिक लक्ष्मी पूजा कमिटी की ओर से सोमवार को बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मां लक्ष्मी पूजा का आयोजन धूमधाम से किया गया. सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचने लगे और पूरे वातावरण में मां लक्ष्मी के जयकारे एवं मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देने लगी. कमिटी के सदस्यों ने विधि-विधान के साथ मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की का मना की। 


पूजा के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक परिधान धारण कर भक्ति भाव से पूजा में भाग लिया. कई श्रद्धालुओं ने परिवार सहित मां लक्ष्मी के समक्ष दीप जलाकर आशीर्वाद प्राप्त किया. इस अवसर पर भक्तों के बीच भोग एवं प्रसाद का वितरण किया गया. मंदिर परिसर को फूलों, झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक आभा छा गई थी.


वहीं पूजा आयोजन कमिटी द्वारा शाम को संगीत संध्या कार्यक्रम रखा गया था। इसका लुफ्त उठाने के लिए महालिमोरूप व आस पास गाँव के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। जमशेदपुर के कलाकारों ने ऐसी मधुर नृत्य गीत संगीत की प्रस्तुति दी जिसे देखकर व सुनकर श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए। यही नहीं बल्कि लोगों को झूमते हुए भी देखा गया। 

मौके पर महालिमोरूप के ग्राम प्रधान श्यामसिंह मुंडरी, वार्ड सदस्य दुर्गा मुंडरी, शैलेंद्र हेम्ब्रम, शंभु महली, अनिरुद्ध प्रमाणिक, हेमसागर प्रधान साहिल मुंडरी, कृष्णा मुंडरी समेत पूजा कमेटी सदस्य व अन्य लोग उपस्थित थे।






रविवार, 28 सितंबर 2025

महालिमोरूप :: दिवंगत समाजसेवी नीलसेन प्रधान के प्रतिमा के ऊपर निर्माण कराया गया शेड

सरायकेला प्रखण्ड के मुरुप पंचायत अन्तर्गत जगन्नाथपुर रंगाटांड में अवस्थित श्रीकृष्ण मन्दिर परिसर पर पूजा आयोजन समिति द्वारा दिवंगत समाजसेवी नीलसेन प्रधान के प्रतिमा व उसके ऊपर शेड का निर्माण कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने का काम की है। इससे पूर्व हाल ही में प्रतिमा का अनावरण हो चुका था। 

मौक पर उपस्थित क्षेत्रीय गौड़ समाज सह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा व मेला संचालन समिति , जगन्नाथपुर (महालिमोरूप) के अध्यक्ष नागेश्वर प्रधान ने बताया कि यह शेड प्रतिमा को धूप और बारिस से बचाएगी। यह ही नहीं बल्कि शेड के निर्माण से प्रतिमा की लुक में भी बढ़ोतरी हुई है, जो लोगों को आकर्षित करेगी।

सचिव हेमसागर प्रधान ने बताया कि समिति द्वारा दिवंगत समाजसेवी नीलसेन प्रधान के स्मृति में प्रतिमा व उसके ऊपर शेड निर्माण कराने का प्रस्तावित योजना था जो आज पूर्ण हो गया। 

मौके पर नागेश्वर प्रधान,हेमसागर प्रधान,जगन्नाथ प्रधान, विकास गोप, महेश लोहार समेत अन्य उपस्थित थे। 

 विदित हो कि दिवंगत समाजसेवी नीलसेन प्रधान का हाल ही में देहांत हो गया। वह चक्रधरपुर के रेलवे ऑफिस सुप्रिडेंट पद पर कार्यरत थे। इसके अलावे वे सामाजिक कार्य में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे। वे गौड़ सेवा संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष, महालिमोरूप क्षेत्रीय गौड़ समाज के अध्यक्ष, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा व मेला संचालन समिति, जगन्नाथपुर के अध्यक्ष एव मुख्य सूत्रधार रहे थे । उनके द्वारा समाज हित में किए गए कार्यों की बौदलत ही समाज के लोगों ने उनकी प्रतिमा श्रीकृष्ण मंदिर परिसर पर स्थापित कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने का काम किए है।

उधर,दिवंगत नीलसेन प्रधान के धर्मपत्नी श्रीमती त्रिपुरा देवी सुपुत्र प्रकाश प्रधान व विकास प्रधान समेत सपरिवार वालों ने क्षेत्रीय गौड़ समाज सह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा व मेला संचालन समिति, जगन्नाथपुर ( महालिमोरूप) के पदाधिकारियों समेत क्षेत्र के सभी समुदाय के लोगों के प्रति आभार प्रकट करते हुए उन्हें 

धन्यवाद दी है, कि जिन्होंने उनके परिवार के मुखिया दिवंगत नीलसेन प्रधान के स्मृति में प्रतिमा व शेड का निर्माण कराने में सहयोग किए है।






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