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Saubhagya Bharat News

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शनिवार, 10 जनवरी 2026

पश्चिम बंगाल: क्या ईडी पर कार्रवाई कर सकती है बंगाल पुलिस, ममता बनर्जी ने दर्ज करवाई है

पश्चिम बंगाल में पार्टी के आईटी सेल प्रमुख के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के बाद तृणमूल कांग्रेस ने दिल्ली से कोलकाता तक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. यह मामला तब और ज्यादा बढ़ गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी के अधिकारियों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज करा दी और कोलकाता में एक विरोध मार्च को लीड किया. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या बंगाल पुलिस सच में ईडी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है या नहीं.कानूनी तौर पर राज्य पुलिस ईडी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. लेकिन इसकी कुछ खास शर्ते हैं. अगर किसी ईडी अधिकारी पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी या फिर आधिकारिक ड्यूटी से संबंधित अपराधिक दुराचार का आरोप है तो राज्य पुलिस या फिर सीबीआई जैसी एजेंसियां मामला दर्ज और उन्हें गिरफ्तार कर सकती हैं.



क्या ईडी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा मिली है: ईडी अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 197 के तहत सुरक्षा मिली हुई है. यह प्रावधान कहता है कि आधिकारिक ड्यूटी के दौरान किए गए कृतियों के लिए किसी भी सरकारी अधिकारी पर मुकदमा चलाने से पहले केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति की जरूरत है. लेकिन यह सुरक्षा तभी लागू होती है जब वह काम सीधे आधिकारिक जिम्मेदारी से जुड़ा हो. यदि कथित कार्य वैध कर्तव्य के दायरे से बाहर आता है, जैसे की जबरदस्ती वसूली या फिर व्यक्तिगत दुराचार तो यह सुरक्षा लागू नहीं होती.

हालांकि बंगाल पुलिस कानूनी तौर पर एफआईआर दर्ज कर सकती है लेकिन प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई कोर्ट की मंजूरी और केंद्र सरकार के इजाजत पर ही निर्भर करेगी. लेकिन यह तभी होगा जब कथित काम आधिकारिक ड्यूटी से जुड़ा हो. 

ईडी की शक्तियां हुई सीमित :बीते कुछ सालों में ईडी की न्यायिक जांच बढ़ी है. 2025 और 2026 के बीच अदालतों ने कुछ बातें साफ की. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया की ईडी मनमानी ढंग से गिरफ्तारियां नहीं कर सकती और उन्हें ठोस सबूत भी दिखाने होंगे. मद्रास हाई कोर्ट ने 2025 में दोहराया था कि ईडी कोई सुपर कॉप नहीं है और वह तभी कार्रवाई कर सकती है जब किसी दूसरी एजेंसी ने पहले ही कोई अपराध दर्ज किया हो.

सोमवार, 5 जनवरी 2026

पश्चिम बंगाल: भोरे-भोर PM मोदी ने CM ममता बनर्जी को दी बधाई

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज 71 साल की हो गई हैं। उनके जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत देश के कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें शुभकामनायें दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने X पर ममता बनर्जी के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की, वहीं राहुल गांधी ने भी उनके स्वस्थ और खुशहाल जीवन की शुभेच्छा जताई।



5 जनवरी 1955 को कोलकाता में जन्मीं ममता बनर्जी भारतीय राजनीति की उन शख्सियतों में हैं, जिन्होंने संघर्ष के दम पर इतिहास रचा। वह पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं और लगातार तीसरी बार राज्य की सत्ता संभाल रही हैं। 2011 में उन्होंने वाममोर्चा के 34 साल पुराने शासन का अंत कर नया राजनीतिक अध्याय लिखा। छात्र जीवन से राजनीति में कदम रखने वाली ममता बनर्जी सात बार सांसद रहीं और केंद्र सरकार में रेल मंत्री समेत कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। पढ़ाई में भी वह पीछे नहीं रहीं, उनके पास बीए, बीएड, कानून और एमए की डिग्रियां हैं।राजनीति के अलावा ममता बनर्जी की पहचान एक कवयित्री, लेखिका और चित्रकार के रूप में भी है। उन्होंने 20 से ज्यादा किताबें लिखीं और 5000 से अधिक पेंटिंग्स बनाई हैं, जिनकी नीलामी से मिली रकम समाजसेवा में दी गई।

मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

बांग्लादेश : पूर्व PM खालिदा जिया का 80 साल की उम्र में निधन, आज सुबह अस्पताल में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली/ढाका : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया है। उन्होंने 80 साल की उम्र में 30 दिसंबर को तड़के ढाका के एवरकेयर अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती थीं। लेकिन पिछली रात उनकी हालत बहुत खराब हो गई। उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने से ढाका के एवरकेयर अस्पताल में हलचल बढ़ गई। खालिदा जिया की गिरती सेहत की खबर मिलते ही अस्पताल के बाहर BNP समर्थकों और नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था।



बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वेरिफाइड फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में कहा गया, “खालिदा जिया का फज्र की नमाज के ठीक बाद सुबह करीब 6 बजे निधन हो गया।”

बांग्लादेश की पहली महिला PM थीं खालिदा जिया : बता दें कि खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला पीएम थीं। वह BNP यानी एवं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की प्रमुख भी थीं। बीएनपी मीडिया सेल के आधिकारिक फेसबुक पेज पर उनके निधन की जानकारी दी गई।

सोमवार, 15 दिसंबर 2025

जामुड़िया: सुवेंदु अधिकारी के दौरे से पहले जामुड़िया में बवाल, बालू ट्रक की टक्कर से भाजपा कर्मी की मौत, सड़क जाम

जामुड़िया: पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के 16 तारीख को आसनसोल और जामुड़िया प्रस्तावित दौरे से पहले ही राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि राज्य में उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।



ताज़ा मामला जामुड़िया के चिचुरिया ग्राम पंचायत अंतर्गत चिचुरिया डंगालपाड़ा इलाके का है, जहां बालू से लदी एक ट्रक की चपेट में आने से भाजपा कर्मी पगला गोप की मौत हो गई। यह हादसा बीती रात करीब 10 बजे हुआ।

मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के बाद जब पुलिस शव को कब्जे में लेने पहुंची, तो मुआवजे की मांग को लेकर विरोध शुरू हो गया। कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई और पूरा इलाका अशांत हो उठा।

आरोप है कि इस दौरान गुस्साई भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हो गई। हालात इतने बिगड़े कि पुलिस पर ईंटों और डंडों से हमला किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इतना ही नहीं, कुछ पुलिस वाहनों में आग लगाए जाने की भी खबर है। हालांकि, इस पूरे मामले पर पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

घटना के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने रानीगंज से सिउड़ी जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 60 को जाम कर दिया और सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। सूचना मिलने पर भाजपा का एक प्रतिनिधि दल भी मौके पर पहुंचा और घटना की कड़ी निंदा की।

प्रदर्शन के दौरान मृतक की पत्नी, भाजपा के राज्य नेता कृष्णदु मुखर्जी और भाजपा जिला अध्यक्ष देबतानु भटाचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया दी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

फिलहाल इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और हालात को नियंत्रण में रखने के प्रयास जारी हैं।

बुधवार, 26 नवंबर 2025

बंगाल में जमा नहीं हुए 10 लाख गणना फार्म, मतदाता सूची से हट सकते हैं नाम

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के एसआईआर के तहत अब तक 10 लाख से अधिक गणना फार्म जमा नहीं हुए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि ऐसे ज्यादातर मतदाता अनुपस्थित, डुप्लिकेट, मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए गए हैं। इस हिसाब से बंगाल में अब तक 10 लाख नाम हटने के संकेत मिले हैं।



सोमवार, 17 नवंबर 2025

दार्जिलिंग मुद्दा: CM ममता बनर्जी ने PM मोदी को फिर लिखा पत्र, वार्ताकार की नियुक्ति रद्द करने का किया अनुरोध

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फिर से पत्र लिखकर केंद्र से अनुरोध किया कि वह दार्जिलिंग पहाड़ियों के गोरखाओं से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी की वार्ताकार के रूप में नियुक्ति को रद्द कर दें। प्रधानमंत्री को लिखे अपने दो पन्नों के पत्र में बनर्जी ने कहा कि यह कदम संवैधानिक प्रावधानों और गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) अधिनियम, 2011 के तहत राज्य के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है।



बनर्जी ने 18 अक्टूबर के अपने पूर्व पत्र का उल्लेख करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने उनकी चिंताओं को स्वीकार किया है और उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री को भेज दिया है। उन्होंने लिखा, ‘‘यह गंभीर चिंता का विषय है कि मेरे पत्र के जवाब में कोई और संवाद किए बिना तथा आपके हस्तक्षेप के बावजूद गृह मंत्रालय के अधीन वार्ताकार का कार्यालय पहले ही काम करना शुरू कर चुका है।''

उन्होंने इस घटनाक्रम को ‘‘वास्तव में चौंकाने वाला'' बताया। बनर्जी ने केंद्र के फैसले को ‘‘एकतरफा और मनमाना'' बताते हुए कहा कि यह ‘‘पश्चिम बंगाल सरकार के परामर्श या सहमति के बिना'' लिया गया है। जीटीए अधिनियम, 2011 का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून ‘‘सरकार को स्पष्ट रूप से पश्चिम बंगाल राज्य की सरकार के रूप में परिभाषित करता है'' और इसलिए ‘‘केंद्र सरकार के पास इन क्षेत्रों से संबंधित मामलों में किसी भी प्रतिनिधि या मध्यस्थ को नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है।''

उत्तर बंगाल में कलिम्पोंग और दार्जिलिंग जिलों के कुछ हिस्सों का शासन इस अधिनियम के तहत आता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र द्वारा वार्ताकार की नियुक्ति संघ और राज्यों के बीच शक्तियों के संवैधानिक वितरण का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक बार फिर आपके हस्तक्षेप की उम्मीद करती हूं और आपसे इस असंवैधानिक और मनमाने आदेश को रद्द करने का अनुरोध करती हूं।''

रविवार, 7 सितंबर 2025

झारखंड-बंगाल के सपनों का संगम

राँची : कोलकाता की रौनक में एक खास लम्हा रहा। जब झारखंड के CM हेमंत सोरेन और पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री एवं कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम आमने-सामने बैठे। 

ये सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि रिश्तों की वो डोर भी मजबूत हुई, जो दो पड़ोसी राज्यों की सरहद से आगे बढ़कर दिलों तक पहुंचती है। बातचीत में विकास और सौहार्द की झलक साफ थी, झारखंड की मिट्टी की खुशबू और कोलकाता की गलियों की पुरानी दोस्ती एक साथ महसूस हुई। यह मुलाकात मानो एक कहानी का नया अध्याय हो, जहां राजनीति की कठोरता नहीं, बल्कि अपनत्व की नरमाहट झलक रही थी। झारखंड और बंगाल की इस साझेदारी से आम लोगों को भी उम्मीद की किरण दिखी कि आने वाले दिनों में दोनों प्रदेशों की दोस्ती रिश्तों से आगे बढ़कर विकास की राह रोशन करेगी।









मंगलवार, 2 सितंबर 2025

बिहार के बाद बंगाल में चुनाव: आखिर क्यों विरोध का झंडा उठाये हुए है तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी

बिहार के बाद बंगाल में भी चुनाव होने है.  भाजपा की बड़ी इच्छा है कि बंगाल में भी उसका झंडा लहराए , लेकिन ममता बनर्जी इसमें बाधक बनी हुई है.  अगले साल बंगाल में भी चुनाव होने हैं और इसको लेकर दोनों तरफ से तैयारी शुरू हो गई है.  इस बीच जो खबरें निकलकर आ रही है, उसके अनुसार तृणमूल कांग्रेस में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है.  चर्चित सांसद कल्याण बनर्जी कतिपय सांसदों के खिलाफ विरोध का झंडा लिए हुए है.  तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी की पार्टी सांसदों के प्रति नाराजगी फिर सामने आई है.  कुछ दिन पहले सांसद महुआ मोइत्रा के साथ विवाद हुआ था. 

पुरानी  बात को याद कर साधा निशाना 


कल्याण बनर्जी ने पुरानी घटना को सामने लाते हुए कहा कि तत्कालीन सांसद रमेश बिधूड़ी  लोकसभा में जब हमारे सांसद महुआ मोइत्रा के बारे में ऐसी बातें कर रहे थे, जो स्वीकार करने योग्य नहीं थी.  मैंने इसका विरोध किया ,तो मुझे भाजपा सांसदों ने धमकी दी.  उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से  हमारी उप नेता  शताब्दी राय ,उस वक़्त खामोश रही.  हमारी पार्टी के कोई भी सांसदों ने कुछ नहीं कहा.  समाजवादी पार्टी के सांसद मेरे समर्थन में आये.  उन्होंने यह भी कहा है कि मुख्यमंत्री और तृणमूल  सुप्रीमो ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के पास पार्टी नेताओं से संबंधित सारे तथ्य  नहीं पहुंच पाते.  बहुत सी बातें फिल्टर होकर पहुंचती है. 


 महुआ मोइत्रा  के साथ फिलहाल कल्याण बनर्जी के कड़वे संबंध है

 

महुआ मोइत्रा  के साथ फिलहाल कल्याण बनर्जी के कड़वे संबंध है.  दोनों के बीच पिछले दिनों विवाद  हुआ.  इसी विवाद की वजह से कल्याण बनर्जी को  लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक के पद से  इस्तीफा देना पड़ा था.  अब कल्याण बनर्जी के निशाने पर शताब्दी राय है.  ऐसे में क्या कल्याण बनर्जी  तृणमूल  कांग्रेस में घुटन  महसूस कर रहे हैं? क्या ममता दीदी की  पार्टी को छोड़कर वह अलग हो सकते हैं? इस तरह की तमाम बातें हवा में तैर  रही है.

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