गुडाबांदा संवाददाता:-बापि,बिसाल
गुडाबांदा - 15 साल बाद भी गुड़ाबांदा प्रखंड में नहीं सुधरी आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत
एक तरफ सरकार हर बच्चे को पोषण और शिक्षा का अधिकार जैसी योजनाओं को लेकर करोड़ों खर्च कर रही है,
वहीं दूसरी ओर गुड़ाबांदा प्रखंड की हकीकत शर्मनाक तस्वीर बयां करती है। प्रखंड गठन को 15 साल बीत चुके हैं, लेकिन यहां के 76 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 24 अब भी किराए के मकानों में या उधारी के भवनों में चल रहे हैं। शेष 52 केंद्र ऐसे सरकारी भवनों या स्कूल परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जिनकी हालत खस्ताहाल है
भोजन व्यवस्था भी लचर, मेनू तक नहीं टंगा : आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए दिए जाने वाले पोषण आहार की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। कहीं रोजाना भोजन नहीं बनता, तो कहीं गुणवत्ता पर सवाल हैं। कई केंद्रों में पोषण मेनू तक नहीं टांगा गया है। ऐसे में बच्चों को मिलने वाला भोजन भी महज औपचारिकता बनकर रह गया है।
रिपोर्ट भेजी गई है प्रभारी सीडीपीओ सह अंचलाधिकारी राजाराम मुंडा ने बताया कि नए भवनों की जरूरत की सच्ची जिला कार्यालय को भेज दी गई
है और जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए भी अनुरोध किया गया है। लेकिन अब तक यहां किसी स्थायी सीडीपीओ की नियुक्ति नहीं हुई है, जिससे योजनाओं स के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा
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