पटना : भारत सरकार ने भूकंप जोन का नया नक्शा जारी कर दिया है। इस नए “अर्थक्वेक डिजाइन कोड-2025” में पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल के 12 जिलों को पहले के जोन-4 से उठाकर सीधे उच्च जोखिम वाले जोन-5 में डाल दिया गया है। ये 12 जिले हैं – भागलपुर, बांका, जमुई, सहरसा, अररिया, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, मुंगेर और खगड़िया। अब इन जिलों में नया मकान, स्कूल, अस्पताल या कोई भी इमारत बनवाते समय पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और भूकंपरोधी नियम मानने होंगे। इससे निर्माण का खर्च भी बढ़ जाएगा।
सबसे ज्यादा खतरे वाला जोन-6
नए नक्शे में मधुबनी और दरभंगा जिले को सबसे खतरनाक जोन-6 में रखा गया है। पूरे हिमालय क्षेत्र को पहली बार जोन-6 में डाला गया है।
दक्षिण बिहार अभी सुरक्षित
गया, रोहतास सहित दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम बिहार के जिले अभी जोन-3 में ही हैं, यानी इनमें भूकंप का खतरा कम है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. बीरेंद्र कुमार कहते हैं, “पहले ये जिले जोन-4 में थे, अब जोन-5 में आ गए हैं। इसका मतलब है कि अब यहाँ 7 से 8 तीव्रता तक का भूकंप आने की आशंका ज्यादा है। इसलिए भवन निर्माण के नियम बहुत सख्त करने होंगे।”
नए नियमों से क्या बदलेगा?
मकानों में मोटे-मजबूत पिलर और बीम लगाने होंगे
ऊँची इमारतों पर और सख्ती होगी
सक्रिय भूकंपीय दरारों (फॉल्ट लाइन) के पास विशेष डिजाइन चाहिए
पुरानी इमारतों की जांच और मजबूती का काम तेज करना होगा
सरकार अब जल्द ही नए भूकंपरोधी निर्माण नियम लागू करेगी। आम लोगों को भी अब घर बनवाते समय इंजीनियर से भूकंपरोधी डिजाइन जरूर बनवाना चाहिए, वरना भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है।







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