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Saubhagya Bharat News

हम सौभाग्य भारत देश और दुनिया की महत्वपूर्ण एवं पुष्ट खबरें उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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The Saubhagya Bharat

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मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

राँची।ओरमांझी थाना के मलखाने में रखे 200 केजी गांजा को चूहें खा गये।

गांजे के साथ पकड़े गये अभियुक्त को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। चूहें के गांजा खाने के मामले में पुलिस कुछ भी बताने से बचती नजर आ रही हैं।

गांजा साल 2022 में पुलिस द्वारा एनएच 33 पर बैरिकेडिंग कर गाड़ियों की तलाशी के दौरान पकड़ाया था। गांजा तस्करी मामले में बिहार के वैशाली जिला के वीरपुर गांव का रहने वाला युवक पकड़ा गया था।

चूहों द्वारा 200 किलो गांजा खाने की बात पुलिस ने खुद कोर्ट में कबूल किया हैं।

एंटी क्राइम चेकिंग के दौरान पुलिस से भिड़े संतोष चौहान को भेजा गया जेल

धनबाद : रविवार की रात्रि एंटी क्राइम चेकिंग के क्रम मे संतोष चौहान पिता कैलाश चौहान पता गोधर 06 नंबर थाना केंदुआडीह जिला धनबाद को पुलिस के कर्तव्य निष्पादन के दौरान दुर्व्यवहार करने,धमकी देने,नशा में गाड़ी चलाने के आरोप में गिरफ्तार कर सोमवार को जेल भेज दिया.बीते रात्रि वरीय पुलिस अधीक्षक महोदय के आदेश के आलोक में रात्रि में केंदुआ पुल के समीप एंटी क्राइम चेकिंग लगा हुआ था.इसी क्रम में रात्रि करीब 11 बजे मोटर साइकिल संख्या JH 10 CV9577 के चालक संतोष चौहान को जांच हेतु रोका गया तो वे भागने का प्रयास किया.तत्पश्चात जब रोका गया तो वे पुलिस के साथ उलझ गए.जब पु अ नि शिबू कुजूर द्वारा समझाने का प्रयास किए तो उनपर हमला कर दिए.उक्त आरोप में अभियुक्त संतोष चौहान के विरुद्ध केंदुआडीह थाना कांड संख्या 128/25दर्ज कर जेल भेजा गया है.


उपायुक्त ने की अस्पताल से चोरी हुए नवजात शिशु के पिताजी से मुलाकात

 *प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता करने का दिया भरोसा*

*पूरे घटनाक्रम की ली विस्तार पूर्वक जानकारी*

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री आदित्य रंजन ने आज संध्या अपने आवासीय कार्यालय में शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से चोरी हुए तथा पुलिस प्रशासन की तत्परता व त्वरित कार्रवाई से सकुशल व सुरक्षित वापस मिल गए नवजात शिशु के पिताजी से मुलाकात की।

उपायुक्त ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया है। उन्होंने नवजात शिशु के पिता श्री सलिकराम मरांडी से पूरे घटनाक्रम की विस्तारपूर्वक जानकारी ली। उनकी जरूरतें पूछी। साथ ही परिवार को जिला प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता प्रदान करने का भरोसा दिया। 

उपायुक्त ने कहा कि अस्पताल से नवजात शिशु की चोरी हो होना अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने अस्पताल की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा नोडल पदाधिकारी सह वरीय प्रबंधक से बात की। साथ ही कहा कि एसएनएमएमसीएच की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक वृहद कार्य योजना तैयार की जाएगी, जिससे भविष्य में ऐसी कोई भी घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो।

मुलाकात के दौरान उपायुक्त ने नवजात शिशु के पिता एवं उनके रिश्तेदारों को गर्म कपड़े एवं कंबल भी प्रदान किए।मौके पर उपायुक्त श्री आदित्य रंजन, श्री रमेश टुडू, नवजात शिशु के पिता श्री सलिकराम मरांडी, एसएनएमएमसीएच के अधीक्षक सह प्रभारी प्राचार्य डॉ डीके गिंदौरिया, सुरक्षा नोडल पदाधिकारी सह वरीय प्रबंधक डॉ शेखर सुमन, कार्यपालक दंडाधिकारी श्री नारायण राम, श्रीमती मीना हेंब्रम व श्री मरांडी के अन्य रिश्तेदार मौजूद थे।

मेहनत की मंजिल, जिम्मेदारी की शुरुआत : IIIT रांची के 370 युवा राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार

 



राँची: 29 दिसंबर 2025 का दिन भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) रांची के लिए सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। यह उन सैकड़ों परिवारों के सपनों के पूरे होने का दिन था, जिनके बच्चे वर्षों की मेहनत के बाद मंच पर डिग्री लेने पहुंचे। झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी परिसर, नामकुम में आयोजित दीक्षांत समारोह में जब छात्रों ने टोपियां संभालीं और नाम पुकारे गए, तो आंखों में आत्मविश्वास और चेहरे पर भविष्य की उम्मीद साफ झलक रही थी।

मंच पर पहुंचे मेहनत के असली नायक

समारोह में बी.टेक. 2020–2024 और 2021–2025 बैच के कुल 370 छात्रों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, एम्बेडेड सिस्टम्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों के विद्यार्थी शामिल थे।

इसके अलावा एम.टेक. और पीएच.डी. शोधार्थियों को भी उनकी डिग्रियां दी गईं। स्वर्ण पदक, रजत पदक और सर्वश्रेष्ठ छात्र सम्मान पाने वाले छात्रों के लिए यह पल वर्षों की मेहनत का इनाम था।

अनुशासन और गरिमा की झलक

दीक्षांत समारोह की शैक्षणिक शोभायात्रा ने कार्यक्रम को गरिमा दी। लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. भट्ट (सेवानिवृत्त) और IIIT रांची के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव के नेतृत्व में निकली यह शोभायात्रा अनुशासन, सेवा और नेतृत्व के मूल्यों का प्रतीक बनी।

डिग्री से आगे की सोच का संदेश

मुख्य अतिथि केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने छात्रों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि यह डिग्री नौकरी पाने का साधन भर नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने छात्रों को तकनीक का उपयोग मानवता, नैतिकता और देशहित के साथ करने की सीख दी।

समाज से जुड़ने की सीख

विशिष्ट अतिथि IIT पटना के निदेशक प्रो. टी.एन. सिंह ने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है जब उसका उपयोग वास्तविक समस्याओं के समाधान में हो। वहीं पद्मश्री सम्मानित समाजसेवी अशोक भगत ने छात्रों को याद दिलाया कि गांव, गरीब और वंचित वर्ग आज भी नवाचार और संवेदनशीलता की उम्मीद कर रहा है।

भविष्य की ओर भरोसेमंद कदम

समारोह के अंत में छात्रों के चेहरों पर उत्साह और जिम्मेदारी दोनों साफ नजर आए। IIIT रांची ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि संस्थान केवल इंजीनियर नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्र निर्माता तैयार कर रहा है। डिग्रियों के साथ घर लौटते ये 370 युवा अब केवल छात्र नहीं रहे। वे भारत के भविष्य की वह पीढ़ी हैं, जिनसे विकसित भारत 2047 की उम्मीद जुड़ी है।

जमशेदपुर: दिशोम जाहेर की धरती पर बढ़ा आदिवासी स्वाभिमान

जमशेदपुर : दिशोम जाहेर, करनडीह की पावन धरती इतिहास की गवाह बनी। संताली संस्कृति, भाषा और अस्मिता के संगम पर आयोजित 22वां संताली ‘परसी महा’ एवं ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष समापन समारोह में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उनके साथ राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। करनडीह जाहेरथान में पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। संताली समाज की आस्था, संस्कृति और गौरव का जीवंत दृश्य झलका। 



CM हेमंत सोरेन ने कहा कि जनजातीय भाषा और संस्कृति को पहचान व सम्मान दिलाने के लिये सरकार प्रतिबद्ध है। संताली भाषा की पढ़ाई ओलचिकी लिपि में सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया। जनजातीय भाषाओं को सुरक्षित, संरक्षित और समृद्ध करने की दिशा में लगातार प्रयास जारी है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों को सम्मानित कर आज गर्व की अनुभूति हो रही है। CM ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रयासों से आदिवासी समाज को नई पहचान मिली है। राष्ट्रपति भवन में भी आदिवासी संस्कृति, परंपरा और भाषा को मंच मिल रहा है। राष्ट्रपति की जितनी प्रशंसा की जाये, कम है। CM हेमंत सोरेन ने गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू को याद करते हुये कहा कि ओलचिकी लिपि ने संथाली भाषा को अलग अस्तित्व दिया, जब तक ओलचिकी और संताल समाज रहेगा, गुरु गोमके अमर रहेंगे। लोकसभा सांसद एवं ऑल संताली राइटर्स एसोसिएशन के सलाहकार कालीपद सोरेन, ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लक्ष्मण किस्कू, जाहेरथान कमिटी अध्यक्ष सी.आर. मांझी सहित बड़ी संख्या में संताली समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे।

राष्ट्रपति के प्रयासों से आदिवासी समाज का बढ़ रहा है मान-सम्मान : सीएम

जमशेदपुर : सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि जनजातीय भाषा और संस्कृति को पहचान एवं सम्मान दिलाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। इस दिशा में आदिवासी समाज के साथ मिलकर प्रयास निरंतर जारी है। इसी क्रम में आज का यह समारोह भी काफी विशेष है। क्योंकि, हमें संताली भाषा और साहित्य के विकास में साहित्यकारों तथा बुद्धिजीवियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित कर गर्व की अनुभूति हो रही है। मौका था 22वां संताली “परसी महा ” एवं ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष समापन समारोह का। समारोह दिशोम जाहेर, करनडीह, जमशेदपुर में आयोजित किया गया था। सीएम हेमंत यहां बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में बोल रहे थे। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शिरकत की।

ओलचिकी लिपि से संथाली भाषा का पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार वचनबद्ध

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड प्रदेश में ओलचिकी लिपि से संथाली भाषा का पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार वचनबद्ध है। साथ ही जनजातीय भाषाओं के विकास और उसे सुरक्षित, संरक्षित और समृद्ध करने की दिशा में हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। आज संताली जैसी जनजातीय भाषाओं से आदिवासी समाज की आवाज बहुत दूर तक पहुंच रही है।

राष्ट्रपति की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम होगी

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज आज अगर सशक्त हो रहा है तो इसमें हमारे देश की परम आदरणीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का इसमें अहम योगदान है। राष्ट्रपति भवन में भी होने वाले कई कार्यक्रमों में आदिवासी समाज और उसकी संस्कृति, परंपरा और पहचान को प्रमुखता के साथ पेश करने का प्रयास होता रहा है। राष्ट्रपति की पहल से आदिवासी समाज का मान-सम्मान बढ़ रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति के प्रयासों की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम ही होगी।

पंडित रघुनाथ मुर्मू को कभी भूल नहीं सकते

मुख्यमंत्री ने कहा कि संथाली भाषा और इसकी लिपि ओल-चिकी का आज अलग वजूद है तो इसमें गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू का योगदान अविस्मरणीय है। आज से सौ वर्ष पहले उन्होंने ओल चिकी के रूप में संथाली भाषा को एक अलग लिपि दी थी। ऐसे में जब तक ओल-चिकी लिपि और आदिवासी‑संताल समाज जीवित रहेगा, तब तक पंडित रघुनाथ मुर्मू अमर रहेंगे।

ये भी रहे मौजूद

इस अवसर पर लोक सभा सांसद एवं ऑल संताली राइटर्स एसोसिएशन के सलाहकार कालीपद सोरेन, ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लक्ष्मण किस्कू, जाहेर थान कमिटी के अध्यक्ष सीआर मांझी समेत संताली समाज के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।

अरावली खनन मामले में SC में सुनवाई, क्या बोला कोर्ट

अरावली खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने 20 नवंबर के पुराने आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लेते हुये केंद्र सरकार से साफ जवाब मांगा है और कहा है कि फैसले में कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण जरूरी है। अब पुराने निर्देश लागू नहीं रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जा सकती है। केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस भेजा गया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।


गौरतलब है कि 24 दिसंबर को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अरावली क्षेत्र को लेकर नये निर्देश जारी किये थे। इनमें पूरे अरावली क्षेत्र में नये खनन पर रोक लगाने की बात कही गई थी, ताकि गुजरात से एनसीआर तक फैली अरावली पर्वत श्रृंखला की अखंडता और जैव-विविधता को सुरक्षित रखा जा सके। साथ ही ICFRE को जिम्मेदारी दी गई है कि वह ऐसे और इलाकों की पहचान करे, जहां खनन बंद किया जाना चाहिये। जो खदानें पहले से चल रही हैं, उन पर भी पर्यावरण नियमों के तहत सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिये गये हैं।

अदाणी एंबुलेंस : सांप काटने से प्रसव तक, हर इमरजेंसी में भरोसेमंद साथी

हजारीबाग ठंडी हवा में धुंध घिरी उस सुबह बड़कागांव प्रखंड के छावनिया पुल के पास एक छात्र अचेत अवस्था में पड़ा मिला। आसपास के लोग घबराए हुए थे। कोई समझ नहीं पा रहा था कि बच्चे की जान बचाई जाए या नहीं। तभी, एक उम्मीद की किरण आई… अदाणी फाउंडेशन की निःशुल्क इमरजेंसी एंबुलेंस मौके पर पहुंची। चालक और स्वास्थ्य कर्मियों ने तुरंत प्राथमिक उपचार किया और बच्चे को बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग रेफर कर दिया। स्थानीय लोग कहते हैं, “अगर समय पर यह मदद नहीं आती, तो अब हम उसे नहीं देखते। यह सेवा हमारे लिए भगवान की तरह है।”

संकट की घड़ी में जीवनदान

बड़कागांव के ग्रामीणों के लिए अस्पताल पहुंचना हमेशा चुनौती रहा है। गढ़े और खराब सड़कें, सीमित वाहन सुविधा और दूरी कभी-कभी जानलेवा साबित होती है। लेकिन चार सालों से अदाणी फाउंडेशन की निःशुल्क एंबुलेंस सेवा ने इन मुश्किलों को काफी हद तक दूर किया है। रामु मंडल, जो अपने बेटे के इलाज के लिए एंबुलेंस का इंतजार कर रहे थे, कहते हैं, “जब एंबुलेंस आई, हम सभी ने राहत की सांस ली। यह सिर्फ वाहन नहीं, जीवनदान है।”

आंकड़े बताते हैं सेवा की अहमियत

बीते चार वर्षों में 387 मरीजों को इस सेवा के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। केवल पिछले तीन महीनों में 25 मरीजों को हजारीबाग और 3 मरीजों को रांची रेफर किया गया। इनमें सांप काटने, बिजली का करंट लगने, छत या पेड़ से गिरने और प्रसव जैसी गंभीर आपात स्थितियां शामिल हैं। फाउंडेशन के स्वास्थ्य अधिकारी बताते हैं, “हर मरीज हमारे लिए अनमोल है। समय पर पहुंचना ही कई बार मौत और जीवन के बीच फर्क करता है।”

गरीब और जरूरतमंदों के लिए वरदान

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सेवा उनके लिए बड़ी राहत है। बिना किसी खर्च के समय पर अस्पताल पहुंचना उनकी चिंता को कम करता है और मानसिक तनाव को भी हल्का करता है। निर्मला देवी, जो अपने छोटे बच्चे की बिमारी में एंबुलेंस की मदद लेकर आईं, कहती हैं, “अब हमें डर नहीं लगता। किसी हादसे या बिमारी में मदद तुरंत आती है।”

स्वास्थ्य से आगे… शिक्षा और समाज सुधार

गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र में अदाणी फाउंडेशन सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह शिक्षा, कौशल विकास, पेयजल, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी काम कर रहा है। स्कूलों में सहयोग, युवाओं के प्रशिक्षण, स्वास्थ्य शिविर और बुनियादी सुविधाओं के विकास से ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है।

एक भरोसेमंद साथी

आज बड़कागांव में अदाणी फाउंडेशन की निःशुल्क एंबुलेंस सेवा केवल वाहन नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में लोगों के लिए भरोसेमंद साथी बन चुकी है। ग्रामीण इसे सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि उम्मीद और सुरक्षा की प्रतीक मानते हैं।

कुछ ही पल में किलो छील लेंगे मटरछीमी, जानिये झटपट तरीके

सर्दियों की दस्तक के साथ ही बाजारों में हरी-भरी मटरछीमी की बहार आ जाती है। कहीं मटर की कचौड़ी की खुशबू है, तो कहीं घुघनी का स्वाद, हर रसोई में मटर अपनी खास जगह बना लेती है। लेकिन इसी मटर के साथ एक समस्या भी आती है, छीलने की झंझट। खासकर जब ज्यादा मात्रा में मटर हो, तो उंगलियां थक जाती हैं और मन उचटने लगता है। अगर आप भी मटर देखकर खुश तो होते हैं, लेकिन छीलने के नाम पर माथा पकड़ लेते हैं, तो ये आसान और देसी ट्रिक्स आपके बड़े काम की हैं। मटरछीमी जल्दी छीलने के आसान और कारगर झटपट तरीके अजमा लें, हल्का उबाल, झटपट कमाल, अगर मटर की फलियां सख्त हैं, तो उन्हें 2–3 मिनट गुनगुने पानी में डाल दें। 



फलियों का छिलका नरम हो जायेगा और मटर फटाफट निकल आयेगी। ध्यान रखें, ज्यादा देर उबालेंगे तो मटर पकने लगेगी। मटर की फली को बीच से हल्के हाथ से दबायें। जैसे ही दबाव पड़ेगा, फली खुल जायेगी और मटर बाहर आने लगेगी। मोटी या ज्यादा पकी फलियों के लिये छोटे चाकू से एक लंबा, हल्का कट लगा दें। फली तुरंत खुल जायेगी और मटर आसानी से निकल आयेगी। नरम मटर की फलियां सूती कपड़े पर रखकर हल्के से रोल करें। कई बार मटर अपने आप फली से बाहर निकल आती है। देसी तरीका, बढ़िया नतीजा।

बोधगया की आत्मा का दस्तावेज बना महाबोधि मंदिर का 2026 कैलेंडर*

बिहार : बोधगया में महाबोधि मंदिर केवल ईंट और पत्थरों से बनी एक संरचना नहीं है। यह वह स्थान है, जहां हर दिन दुनिया भर से आए लोग शांति की तलाश में सिर झुकाते हैं। सोमवार को जब महाबोधि महाविहार प्रबंध समिति ने वर्ष 2026 का वार्षिक कैलेंडर जारी किया, तो यह सिर्फ तारीखों का संग्रह नहीं रहा, बल्कि उन अनगिनत भावनाओं की झलक बन गया, जो इस परिसर से जुड़ी हैं। समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित सादे लेकिन भावनात्मक कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी सह बीटीएमसी अध्यक्ष श्री शशांक शुभंकर ने कैलेंडर का विमोचन किया। मौजूद भिक्खुओं, अधिकारियों और सदस्यों के चेहरों पर एक संतोष साफ दिख रहा था, जैसे बोधगया की आत्मा को कागज पर उतार दिया गया हो।

हर पन्ना, एक अनुभूति

इस 12 पृष्ठीय कैलेंडर का पहला पन्ना महाबोधि मंदिर के भव्य स्वरूप के साथ वर्ष 2026 के प्रमुख आयोजनों की जानकारी देता है। आगे के हर महीने में ऐसा लगता है मानो पाठक खुद मंदिर परिसर में टहल रहा हो।

जनवरी में गर्भगृह में विराजमान भगवान बुद्ध की शांत मुद्रा दिखाई देती है, जो मन को ठहराव देती है। फरवरी में मंदिर के शिखर और स्वर्णिम छत्र की आभा आस्था को और गहरा करती है। मार्च की रात में एलईडी रोशनी से जगमगाता मंदिर मानो यह संदेश देता है कि अंधेरे में भी प्रकाश का मार्ग होता है। अप्रैल का एरियल व्यू हरियाली और निरंजना नदी के साथ मंदिर को एक जीवंत स्वरूप देता है। मई में बोधिवृक्ष के नीचे कठिन चीवर दान का दृश्य त्याग और करुणा की परंपरा को सामने लाता है। जून में नदी के पानी में पड़ती महाबोधि की छाया ठहर कर देखने को मजबूर करती है।

बोधिवृक्ष के साए में जीवन

जुलाई और अगस्त के पन्नों में बोधिवृक्ष की जड़ें और नई कोंपलें दिखाई देती हैं। ये सिर्फ तस्वीरें नहीं, बल्कि जीवन के निरंतर चलते रहने का प्रतीक हैं। सितंबर में जब विदेशी नागरिक श्वेत वस्त्र पहनकर श्रामणेर दीक्षा लेते नजर आते हैं, तो यह साफ हो जाता है कि महाबोधि मंदिर की करुणा की धारा सीमाओं से परे है। अक्टूबर में रत्न चंक्रमण चैत्य, नवंबर में बोधिसत्व की प्रतिमा और दिसंबर में मुख्य द्वार से दिखता मंदिर, साल का समापन उसी भव्यता और शांति के साथ करता है, जिससे बोधगया की पहचान बनी है।

सुविधा भी, संवेदना भी

कैलेंडर के विमोचन के दौरान यह भी बताया गया कि बीटीएमसी मंदिर के विकास के साथ मानवीय जरूरतों का भी ध्यान रख रही है। नए कार्यालय भवन का निर्माण, सौर ऊर्जा का उपयोग और वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए रैम्प का विस्तार, ये सभी प्रयास इस बात का संकेत हैं कि आस्था के साथ सुविधा भी जरूरी है।

एक कैलेंडर, कई कहानियां

कार्यक्रम में चीफ मोंक वेन चालिन्दा भंते, वरीय भिक्खु वेन डॉ मनोज भंते, सचिव डॉ महाश्वेता महारथी और बीटीएमसी के सदस्य मौजूद थे। सबकी जुबान पर एक ही बात थी कि यह कैलेंडर साल भर दीवार पर टंगा रहने वाला कागज नहीं, बल्कि हर सुबह देखने पर मन को शांति देने वाला साथी बनेगा। महाबोधि मंदिर का यह कैलेंडर 2026 के दिनों को गिनने के साथ साथ इंसान को खुद से जुड़ने का मौका भी देता है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।

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