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मंगलवार, 30 दिसंबर 2025
जमशेदपुर: दिशोम जाहेर की धरती पर बढ़ा आदिवासी स्वाभिमान
राष्ट्रपति के प्रयासों से आदिवासी समाज का बढ़ रहा है मान-सम्मान : सीएम
जमशेदपुर : सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि जनजातीय भाषा और संस्कृति को पहचान एवं सम्मान दिलाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। इस दिशा में आदिवासी समाज के साथ मिलकर प्रयास निरंतर जारी है। इसी क्रम में आज का यह समारोह भी काफी विशेष है। क्योंकि, हमें संताली भाषा और साहित्य के विकास में साहित्यकारों तथा बुद्धिजीवियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित कर गर्व की अनुभूति हो रही है। मौका था 22वां संताली “परसी महा ” एवं ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष समापन समारोह का। समारोह दिशोम जाहेर, करनडीह, जमशेदपुर में आयोजित किया गया था। सीएम हेमंत यहां बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में बोल रहे थे। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शिरकत की।
ओलचिकी लिपि से संथाली भाषा का पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार वचनबद्ध
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड प्रदेश में ओलचिकी लिपि से संथाली भाषा का पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार वचनबद्ध है। साथ ही जनजातीय भाषाओं के विकास और उसे सुरक्षित, संरक्षित और समृद्ध करने की दिशा में हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। आज संताली जैसी जनजातीय भाषाओं से आदिवासी समाज की आवाज बहुत दूर तक पहुंच रही है।
राष्ट्रपति की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम होगी
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज आज अगर सशक्त हो रहा है तो इसमें हमारे देश की परम आदरणीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का इसमें अहम योगदान है। राष्ट्रपति भवन में भी होने वाले कई कार्यक्रमों में आदिवासी समाज और उसकी संस्कृति, परंपरा और पहचान को प्रमुखता के साथ पेश करने का प्रयास होता रहा है। राष्ट्रपति की पहल से आदिवासी समाज का मान-सम्मान बढ़ रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति के प्रयासों की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम ही होगी।
पंडित रघुनाथ मुर्मू को कभी भूल नहीं सकते
मुख्यमंत्री ने कहा कि संथाली भाषा और इसकी लिपि ओल-चिकी का आज अलग वजूद है तो इसमें गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू का योगदान अविस्मरणीय है। आज से सौ वर्ष पहले उन्होंने ओल चिकी के रूप में संथाली भाषा को एक अलग लिपि दी थी। ऐसे में जब तक ओल-चिकी लिपि और आदिवासी‑संताल समाज जीवित रहेगा, तब तक पंडित रघुनाथ मुर्मू अमर रहेंगे।
ये भी रहे मौजूद
इस अवसर पर लोक सभा सांसद एवं ऑल संताली राइटर्स एसोसिएशन के सलाहकार कालीपद सोरेन, ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लक्ष्मण किस्कू, जाहेर थान कमिटी के अध्यक्ष सीआर मांझी समेत संताली समाज के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।
अरावली खनन मामले में SC में सुनवाई, क्या बोला कोर्ट
अरावली खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने 20 नवंबर के पुराने आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लेते हुये केंद्र सरकार से साफ जवाब मांगा है और कहा है कि फैसले में कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण जरूरी है। अब पुराने निर्देश लागू नहीं रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जा सकती है। केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस भेजा गया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।
अदाणी एंबुलेंस : सांप काटने से प्रसव तक, हर इमरजेंसी में भरोसेमंद साथी
हजारीबाग ठंडी हवा में धुंध घिरी उस सुबह बड़कागांव प्रखंड के छावनिया पुल के पास एक छात्र अचेत अवस्था में पड़ा मिला। आसपास के लोग घबराए हुए थे। कोई समझ नहीं पा रहा था कि बच्चे की जान बचाई जाए या नहीं। तभी, एक उम्मीद की किरण आई… अदाणी फाउंडेशन की निःशुल्क इमरजेंसी एंबुलेंस मौके पर पहुंची। चालक और स्वास्थ्य कर्मियों ने तुरंत प्राथमिक उपचार किया और बच्चे को बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग रेफर कर दिया। स्थानीय लोग कहते हैं, “अगर समय पर यह मदद नहीं आती, तो अब हम उसे नहीं देखते। यह सेवा हमारे लिए भगवान की तरह है।”
संकट की घड़ी में जीवनदान
बड़कागांव के ग्रामीणों के लिए अस्पताल पहुंचना हमेशा चुनौती रहा है। गढ़े और खराब सड़कें, सीमित वाहन सुविधा और दूरी कभी-कभी जानलेवा साबित होती है। लेकिन चार सालों से अदाणी फाउंडेशन की निःशुल्क एंबुलेंस सेवा ने इन मुश्किलों को काफी हद तक दूर किया है। रामु मंडल, जो अपने बेटे के इलाज के लिए एंबुलेंस का इंतजार कर रहे थे, कहते हैं, “जब एंबुलेंस आई, हम सभी ने राहत की सांस ली। यह सिर्फ वाहन नहीं, जीवनदान है।”
आंकड़े बताते हैं सेवा की अहमियत
बीते चार वर्षों में 387 मरीजों को इस सेवा के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। केवल पिछले तीन महीनों में 25 मरीजों को हजारीबाग और 3 मरीजों को रांची रेफर किया गया। इनमें सांप काटने, बिजली का करंट लगने, छत या पेड़ से गिरने और प्रसव जैसी गंभीर आपात स्थितियां शामिल हैं। फाउंडेशन के स्वास्थ्य अधिकारी बताते हैं, “हर मरीज हमारे लिए अनमोल है। समय पर पहुंचना ही कई बार मौत और जीवन के बीच फर्क करता है।”
गरीब और जरूरतमंदों के लिए वरदान
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सेवा उनके लिए बड़ी राहत है। बिना किसी खर्च के समय पर अस्पताल पहुंचना उनकी चिंता को कम करता है और मानसिक तनाव को भी हल्का करता है। निर्मला देवी, जो अपने छोटे बच्चे की बिमारी में एंबुलेंस की मदद लेकर आईं, कहती हैं, “अब हमें डर नहीं लगता। किसी हादसे या बिमारी में मदद तुरंत आती है।”
स्वास्थ्य से आगे… शिक्षा और समाज सुधार
गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र में अदाणी फाउंडेशन सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह शिक्षा, कौशल विकास, पेयजल, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी काम कर रहा है। स्कूलों में सहयोग, युवाओं के प्रशिक्षण, स्वास्थ्य शिविर और बुनियादी सुविधाओं के विकास से ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है।
आज बड़कागांव में अदाणी फाउंडेशन की निःशुल्क एंबुलेंस सेवा केवल वाहन नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में लोगों के लिए भरोसेमंद साथी बन चुकी है। ग्रामीण इसे सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि उम्मीद और सुरक्षा की प्रतीक मानते हैं।
कुछ ही पल में किलो छील लेंगे मटरछीमी, जानिये झटपट तरीके
सर्दियों की दस्तक के साथ ही बाजारों में हरी-भरी मटरछीमी की बहार आ जाती है। कहीं मटर की कचौड़ी की खुशबू है, तो कहीं घुघनी का स्वाद, हर रसोई में मटर अपनी खास जगह बना लेती है। लेकिन इसी मटर के साथ एक समस्या भी आती है, छीलने की झंझट। खासकर जब ज्यादा मात्रा में मटर हो, तो उंगलियां थक जाती हैं और मन उचटने लगता है। अगर आप भी मटर देखकर खुश तो होते हैं, लेकिन छीलने के नाम पर माथा पकड़ लेते हैं, तो ये आसान और देसी ट्रिक्स आपके बड़े काम की हैं। मटरछीमी जल्दी छीलने के आसान और कारगर झटपट तरीके अजमा लें, हल्का उबाल, झटपट कमाल, अगर मटर की फलियां सख्त हैं, तो उन्हें 2–3 मिनट गुनगुने पानी में डाल दें।
फलियों का छिलका नरम हो जायेगा और मटर फटाफट निकल आयेगी। ध्यान रखें, ज्यादा देर उबालेंगे तो मटर पकने लगेगी। मटर की फली को बीच से हल्के हाथ से दबायें। जैसे ही दबाव पड़ेगा, फली खुल जायेगी और मटर बाहर आने लगेगी। मोटी या ज्यादा पकी फलियों के लिये छोटे चाकू से एक लंबा, हल्का कट लगा दें। फली तुरंत खुल जायेगी और मटर आसानी से निकल आयेगी। नरम मटर की फलियां सूती कपड़े पर रखकर हल्के से रोल करें। कई बार मटर अपने आप फली से बाहर निकल आती है। देसी तरीका, बढ़िया नतीजा।
बोधगया की आत्मा का दस्तावेज बना महाबोधि मंदिर का 2026 कैलेंडर*
बिहार : बोधगया में महाबोधि मंदिर केवल ईंट और पत्थरों से बनी एक संरचना नहीं है। यह वह स्थान है, जहां हर दिन दुनिया भर से आए लोग शांति की तलाश में सिर झुकाते हैं। सोमवार को जब महाबोधि महाविहार प्रबंध समिति ने वर्ष 2026 का वार्षिक कैलेंडर जारी किया, तो यह सिर्फ तारीखों का संग्रह नहीं रहा, बल्कि उन अनगिनत भावनाओं की झलक बन गया, जो इस परिसर से जुड़ी हैं। समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित सादे लेकिन भावनात्मक कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी सह बीटीएमसी अध्यक्ष श्री शशांक शुभंकर ने कैलेंडर का विमोचन किया। मौजूद भिक्खुओं, अधिकारियों और सदस्यों के चेहरों पर एक संतोष साफ दिख रहा था, जैसे बोधगया की आत्मा को कागज पर उतार दिया गया हो।
हर पन्ना, एक अनुभूति
इस 12 पृष्ठीय कैलेंडर का पहला पन्ना महाबोधि मंदिर के भव्य स्वरूप के साथ वर्ष 2026 के प्रमुख आयोजनों की जानकारी देता है। आगे के हर महीने में ऐसा लगता है मानो पाठक खुद मंदिर परिसर में टहल रहा हो।
जनवरी में गर्भगृह में विराजमान भगवान बुद्ध की शांत मुद्रा दिखाई देती है, जो मन को ठहराव देती है। फरवरी में मंदिर के शिखर और स्वर्णिम छत्र की आभा आस्था को और गहरा करती है। मार्च की रात में एलईडी रोशनी से जगमगाता मंदिर मानो यह संदेश देता है कि अंधेरे में भी प्रकाश का मार्ग होता है। अप्रैल का एरियल व्यू हरियाली और निरंजना नदी के साथ मंदिर को एक जीवंत स्वरूप देता है। मई में बोधिवृक्ष के नीचे कठिन चीवर दान का दृश्य त्याग और करुणा की परंपरा को सामने लाता है। जून में नदी के पानी में पड़ती महाबोधि की छाया ठहर कर देखने को मजबूर करती है।
बोधिवृक्ष के साए में जीवन
जुलाई और अगस्त के पन्नों में बोधिवृक्ष की जड़ें और नई कोंपलें दिखाई देती हैं। ये सिर्फ तस्वीरें नहीं, बल्कि जीवन के निरंतर चलते रहने का प्रतीक हैं। सितंबर में जब विदेशी नागरिक श्वेत वस्त्र पहनकर श्रामणेर दीक्षा लेते नजर आते हैं, तो यह साफ हो जाता है कि महाबोधि मंदिर की करुणा की धारा सीमाओं से परे है। अक्टूबर में रत्न चंक्रमण चैत्य, नवंबर में बोधिसत्व की प्रतिमा और दिसंबर में मुख्य द्वार से दिखता मंदिर, साल का समापन उसी भव्यता और शांति के साथ करता है, जिससे बोधगया की पहचान बनी है।
सुविधा भी, संवेदना भी
कैलेंडर के विमोचन के दौरान यह भी बताया गया कि बीटीएमसी मंदिर के विकास के साथ मानवीय जरूरतों का भी ध्यान रख रही है। नए कार्यालय भवन का निर्माण, सौर ऊर्जा का उपयोग और वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए रैम्प का विस्तार, ये सभी प्रयास इस बात का संकेत हैं कि आस्था के साथ सुविधा भी जरूरी है।
एक कैलेंडर, कई कहानियां
कार्यक्रम में चीफ मोंक वेन चालिन्दा भंते, वरीय भिक्खु वेन डॉ मनोज भंते, सचिव डॉ महाश्वेता महारथी और बीटीएमसी के सदस्य मौजूद थे। सबकी जुबान पर एक ही बात थी कि यह कैलेंडर साल भर दीवार पर टंगा रहने वाला कागज नहीं, बल्कि हर सुबह देखने पर मन को शांति देने वाला साथी बनेगा। महाबोधि मंदिर का यह कैलेंडर 2026 के दिनों को गिनने के साथ साथ इंसान को खुद से जुड़ने का मौका भी देता है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
जम्मू: क्रेन से टकराई रोडवेज बस, 50 लोगों का क्या हुआ हाल
जम्मू की रिंग रोड पर सोमवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। पंजाब से जम्मू आ रही पंजाब रोडवेज की बस सड़क किनारे खड़ी एक क्रेन से जा टकराई। हादसे में करीब 50 यात्री घायल हो गये, जिनमें 3 से 4 की हालत गंभीर बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, रिंग रोड पर क्रेन की मदद से स्ट्रीट लाइट लगाने का काम चल रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार बस नियंत्रण खो बैठी और क्रेन से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।
हादसे के बाद पुलिस और आपातकालीन टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। फिलहाल सभी घायलों का इलाज जारी है। दुर्घटना के कारण रिंग रोड पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, वहीं प्रशासन ने वाहन चालकों से सतर्कता बरतने की अपील की है।
*गुमला का कल बदला रहेगा ट्रैफिक रूट, इन रास्तों पर नो एंट्री*
झारखंड : गुमला जिले में 30 दिसंबर को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम है। राष्ट्रपति रायडीह थाना क्षेत्र के मांझाटोली पहुंचेंगी। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने यातायात व्यवस्था में अस्थायी बदलाव किया है। प्रशासन का कहना है कि इन बदलावों का मकसद आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना है।
भारी वाहनों पर पूरी तरह रोक
प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार 29 दिसंबर 2025 को सुबह 8 बजे से लेकर 30 दिसंबर को कार्यक्रम समाप्त होने तक गुमला शहरी क्षेत्र और रायडीह थाना क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। भारी वाहनों को रोकने के लिए कई प्रमुख स्थानों पर ड्रॉप गेट लगाए गए हैं।
इन स्थानों पर लगाए गए हैं ड्रॉप गेट
पॉलिटेकनिक कॉलेज चंदाली
चपका
आंजन टोल प्लाजा
सिसई
पुगु बाइपास रोड चौक
हंसेरा मोड़
उर्मी चौक
सीलम (रायडीह से गुमला की ओर)
टंगरा स्कूल मोड़
कांसिर चैनपुर मोड़
चैनपुर रोड केराडीह
NH-43 पर 30 दिसंबर को सभी वाहनों की नो एंट्री
30 दिसंबर 2025 को गुमला से रायडीह और मांझाटोली होते हुए जशपुर जाने वाली NH-43 पर सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
जशपुर जाने वाले वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग
गुमला से जशपुर जाने वाले निजी और यात्री वाहन मिशन चौक मांझाटोली से पुराने रायडीह मार्ग की ओर मोड़े जाएंगे। वाहन मोकरा और कोण्डरा होते हुए आरा सुरसांग बॉर्डर के रास्ते जशपुर छत्तीसगढ़ पहुंचेंगे।
चैनपुर, डुमरी और जारी जाने वाले वाहनों के लिए व्यवस्था
गुमला शहरी क्षेत्र से चैनपुर, डुमरी, जारी और कुरूमगढ़ जाने वाले वाहन टंगरा स्कूल मोड़ से कांसिर और चैनपुर मार्ग का उपयोग करेंगे। वहीं डुमरी, जारी और चैनपुर से गुमला आने वाले सभी वाहन कांसिर मोड़ चैनपुर से गुमला की ओर प्रवेश करेंगे।
प्रशासन की आम लोगों से अपील
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित यातायात निर्देशों का पालन करें और प्रशासन का सहयोग करें। इससे राष्ट्रपति का भ्रमण कार्यक्रम सुरक्षित, व्यवस्थित और सफल तरीके से संपन्न कराया जा सकेगा।
राष्ट्रपति ने ओल चिकी लिपि की शताब्दी समारोह को बना दिया यादगार
जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान प्रांगण में सोमवार को आयोजित 22वें संताली ‘परसी माहा’ एवं ओल चिकी लिपि शताब्दी समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संथाली भाषा में गीत गाकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत लगभग तीन मिनट तक “जोहार जोहार आयो…” गीत से की, जिसे सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गए।
संथाली भाषा और ओल चिकी लिपि का महत्व
राष्ट्रपति ने अपने जीवन संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि समाज के प्रेम और इष्टदेवों के आशीर्वाद ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उन्होंने ओल चिकी लिपि को संथाली समाज की पहचान, आत्मसम्मान और एकता का आधार बताया। राष्ट्रपति ने संविधान में संथाली अनुवाद का महत्व बताते हुए कहा कि जब कानून और अधिकारों की जानकारी मातृभाषा में होगी तो समाज सशक्त बनेगा और निर्दोष लोग न्याय से वंचित नहीं होंगे।
साहित्य और संस्कृति के संरक्षण में योगदान
राष्ट्रपति ने ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन के योगदान की सराहना की और भरोसा जताया कि वे ओल चिकी लिपि और संथाली समाज के संरक्षण व विकास के लिए लगातार प्रयास करेंगी। समारोह में साहित्यकारों, शिक्षकों और साधकों को सम्मानित भी किया गया।
यह आयोजन जनजातीय संस्कृति की जीवंतता और गर्व का प्रतीक : राज्यपाल
समारोह में मौजूद प्रदेश के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति की जीवंतता और गर्व का प्रतीक है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जीवन संघर्ष को पूरे आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया और जमशेदपुर को सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक शहर बताया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था और ओल चिकी लिपि हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। राज्यपाल ने कहा कि राज्यपाल भवन जनजातीय भाषाओं और संस्कृतियों के संरक्षण के लिए हमेशा सक्रिय रहेगा।
जनजातीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है राज्य सरकार : सीएम
सीएम हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संथाली भाषा और ओल चिकी लिपि के विकास में योगदान ऐतिहासिक महत्व का है। उन्होंने संविधान के संथाली अनुवाद को समाज के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि
गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू ने संथाली समाज को लिपि देकर जो पहचान दी, उसके लिए पूरा समाज उनका आभारी है। सीएम ने यह भी कहा कि राज्य सरकार जनजातीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है।
इन्हें मिला सम्मान
समारोह के समापन अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संथाली साहित्य और ओल चिकी लिपि को समृद्ध करने वाले साहित्यकारों, शिक्षकों और साधकों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में शोभनाथ बेसरा, पद्मश्री डॉ. दमयंती बेसरा, मुचीराम हेम्ब्रॉम, भीमवार मुर्मू, साखी मुर्मू, रामदास मुर्मू, चुंडा सोरेन सिपाही, छोतराय बास्के, निरंजन हंसदा, बी.बी. सुंदरमन, सौरव, शिव शंकर कंडेयांग, सी.आर. माझी सहित कई अन्य नाम शामिल रहे।
बांग्लादेश : पूर्व PM खालिदा जिया का 80 साल की उम्र में निधन, आज सुबह अस्पताल में ली अंतिम सांस
नई दिल्ली/ढाका : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया है। उन्होंने 80 साल की उम्र में 30 दिसंबर को तड़के ढाका के एवरकेयर अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती थीं। लेकिन पिछली रात उनकी हालत बहुत खराब हो गई। उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने से ढाका के एवरकेयर अस्पताल में हलचल बढ़ गई। खालिदा जिया की गिरती सेहत की खबर मिलते ही अस्पताल के बाहर BNP समर्थकों और नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वेरिफाइड फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में कहा गया, “खालिदा जिया का फज्र की नमाज के ठीक बाद सुबह करीब 6 बजे निधन हो गया।”
बांग्लादेश की पहली महिला PM थीं खालिदा जिया : बता दें कि खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला पीएम थीं। वह BNP यानी एवं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की प्रमुख भी थीं। बीएनपी मीडिया सेल के आधिकारिक फेसबुक पेज पर उनके निधन की जानकारी दी गई।
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