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Saubhagya Bharat News

हम सौभाग्य भारत देश और दुनिया की महत्वपूर्ण एवं पुष्ट खबरें उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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The Saubhagya Bharat

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शनिवार, 10 जनवरी 2026

ओडिशा समाज के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता विभूति दास का निधन, शोक की लहर

 गोलमुरी उत्कल समाज के भूतपूर्व उपाध्यक्ष तथा उत्कल सम्मिलनी के कार्यकारी सदस्य विभूति दास निधन कल टाटा मेन हस्पताल में हुई। वे बहुत दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका आकस्मिक निधन से जमशेदपुर ओडिआ समाज के एक सामाजिक कार्यकर्ता को खो दिया। गोलमुरी उत्कल समाज की कॉलेज के निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान था अपना पूरी जिंदगी समाज सेवा में लगा दिया था। उन्होंने अपने पीछे दो पुत्र पुत्रवधू तथा पोता पोती छोड़े गए हैं । उनके आकस्मिक निधन से उत्कल सम्मेलन के अध्यक्ष श्री रविंद्र नाथ सतपति , उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार दास सचिव प्रदीप कुमार दास , पर्यवेक्षक जयराम दासपात्रा, सदस्य बसंत श्रीचंदन तथा उत्कल एसोसिएशन साकची के महामंत्री श्री तरुण कुमार महंती ने शोक व्यक्त किया। उनका अंतिम सुवर्णरेखा संस्कार शवदाह गृह में कर दिया गया।



60% हैंडीकैप इंसान हूं, यह जॉब मेरे...'; कोर्ट के अहलमद ने मरने से पहले सुसाइड नोट में बयां किया दर्द

राजधानी दिल्ली के साकेत कोर्ट में अहलमद हरीश सिंह महार ने इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें मृतक ने काम के दबाव और 60% दिव्यांगता के कारण हो रही परेशानी को आत्महत्या का कारण बताया है।


लालू से 8 महीने बाद म‍िले तेज प्रताप; दही-चूड़ा भोज का द‍िया न्‍योता; तेजस्‍वी को देखकर भी क‍ि‍या इग्‍नोर

 लैंड फॉर जॉब केस में आरोप तय होने के बाद, तेज प्रताप यादव ने आठ महीने बाद अपने पिता लालू यादव और बहनों से मुलाकात की। उन्होंने मीसा भारती के आवास पर लालू को 14 जनवरी को पटना में आयोजित दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया।


पूरे दिल्ली NCR का प्रदूषण होगा खत्म, हरियाणा से बड़ा प्रोजेक्ट शुरू; प्रकृति से जुड़ेंगे बच्चे-महिलाएं और बुजुर्ग

हरियाणा सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 'इको-वन' परियोजना शुरू की है। फरीदाबाद से शुरू हुई इस पहल में अनुपयोगी भूमि को मिनी फॉरेस्ट में बदला जा रहा है।


20 की पानी बोतल 55 रुपये में, उपभोक्ता आयोग पहुंचे ग्राहक; रेस्टोरेंट को अब देना होगा इतना मुआवजा

 चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने सेक्टर-17 के गजल रेस्टोरेंट को मिनरल वाटर पर एमआरपी से अधिक शुल्क लेने का दोषी पाया है। रेस्टोरेंट ने 20 रुपये की बोतल 55 रुपये में बेची और उस पर जीएसटी भी लगाया।


MI W vs RCB W: बेंगलुरु ने जीत के साथ किया चौथे सीजन का आगाज

 महिला प्रीमियर लीग (WPL) के चौथे सीजन का आगाज शुक्रवार को भव्य अंदाज में हुआ। नादिन डी क्लार्क की फिफ्टी के चलते रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने मुंबई इंडियंस को पहले मैच में 3 विकेट से हराया। क्‍लार्क ने 44 गेंदों पर 63 रन की नाबाद पारी खेली। प्रेमा रावत ने उनका साथ दिया।


खांसी की एक और दवाई पर लगा प्रतिबंध, सरकार ने खरीद-बिक्री पर लगाई रोक; सेवन करने से जा सकती है जान

हरियाणा में बच्चों की खांसी की एक और दवाई पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसमें निर्धारित सीमा से अधिक एथिलीन ग्लाइकोल पाया गया, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।


दिल्ली IGI एयरपोर्ट पर उड़ानों की रफ्तार थमी: इंडिगो शेड्यूल, रनवे क्लोजर या कुछ और?

 


दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर 2025 में यात्री यातायात में ठहराव देखा गया, जो 2024 के स्तर पर रहा। यह COVID-19 और 2008 की मंदी के बाद तीसरी बार है जब IGIA में वृद्धि नहीं हुई। मुख्य रनवे बंद होने, पाकिस्तानी एयरस्पेस प्रतिबंधों, एयर इंडिया दुर्घटना और इंडिगो की शेड्यूल गड़बड़ी जैसे कारणों से हवाई अड्डे की क्षमता प्रभावित हुई, जिससे यात्रियों की संख्या स्थिर रही।_

फिल्मी स्टाइल में ले गई फाइल; अब ममता को ले डूबेगा ED का 'ब्रह्मास्त्र

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय की ताज़ातरीन कार्रवाई ने न केवल चुनावी सूबे, बल्कि समूचे देश में हड़कंप मचा दिया है। I-PAC के निर्देशक प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर बीते कल यानी गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) छापेमारी के लिए पहुंची।

लेकिन इसके कुछ देर बाद ही राज्य की सीएम ममता बनर्जी का काफिला I-PAC के ऑफिस पहुंचा। जहां से वह फाइल्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस अपने साथ ले गईं।

इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। ईडी ने कार्रवाई में दखल देने और सुबूतों को चुराने का आरोप लगाया तो ममता बनर्जी ने ED पर चुनावी रणनीति और इलेक्शन डेटा चुराने का आरोप लगाया। दोनों ही पक्षों ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जहां आज हंगामे के चलते सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टाल दी गई।

ED एक्शन के बीच उमड़े कई सवाल

इस सियासी और दुनियावी बखेड़े की बीच सभी के जेहन में कुछ सवाल उमड़ रहे हैं। उनमें सबसे अव्वल यह है कि ED क्या है और कैसे काम करती है? यह केन्द्रीय एजेंसी इतनी ताकतवर कैसे है? वो कानून कौन से हैं जो इसे अथाह शक्तियां प्रदान करते हैं? सबसे अहम और आखिरी सवाल कि इस मामले में ममता बनर्जी के साथ क्या होगा

कब और क्यों किया गया ED का गठन

प्रवर्तन निदेशालय (ED) का इतिहास भारत की आजादी के पहले दशक से जुड़ा है। इसका गठन 1 मई, 1956 को किया गया था। उस समय इसे ‘प्रवर्तन इकाई’ (Enforcement Unit) के नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के तहत की गई थी। एक साल बाद 1957 में इसका नाम बदलकर प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) कर दिया गया।

उस दौर में इसका मुख्य काम ‘विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947’ (FERA – फेरा) के तहत विनिमय नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन को रोकना था। आसान शब्दों में कहें तो, इसका काम यह देखना था कि देश से विदेशी मुद्रा बाहर न जाए और विदेशी मुद्रा से जुड़े कानूनों का पालन हो। तब तक ED को इतना गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था।कैसे दो शहरों से देशभर में फैला जाल...

शुरुआत में बॉम्बे और कलकत्ता (अब मुंबई और कोलकाता) में ही इसके दफ्तर थे। लेकिन आज इसका जाल पूरे देश में फैल चुका है। साल 1960 में इसके प्रशासनिक नियंत्रण को आर्थिक मामलों के विभाग से राजस्व विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया, और तब से यह इसी विभाग का हिस्सा है। यहां से इसकी शक्तियों में थोड़ा सा इजाफा हो गया।

अटल सरकार ने ED को दिया ब्रह्मास्त्र

साल 1999 की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 (FEMA) पारित किया। इस कानून ने ED के आधार को और मजूबत किया। लेकिन अब भी वह इतनी पॉवरफुल नहीं थी कि सियासी रसूखदारों पर सीधी कार्रवाई कर सके। लेकिन 3 साल बाद ही सरकार ने ‘धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA)’ पारित करते हुए ED को ‘ब्रह्मास्त्र’ दे दिया।

PMLA क्यों बनाता ED को सुपरपॉवर

ED के सामने इकबालिया बयान: यह ED की सबसे बड़ी ताकत है। सामान्य पुलिस केस में, पुलिस के सामने दिया गया आरोपी का बयान कोर्ट में सबूत नहीं माना जाता। लेकिन PMLA की धारा 50 के तहत, ED अधिकारी के सामने दिया गया बयान कोर्ट में सबूत (Admissible Evidence) माना जाता है। यानी, अगर आरोपी ने पूछताछ में गुनाह कबूल कर लिया, तो वह कोर्ट में उसके खिलाफ इस्तेमाल होगा।

संपत्ति जब्त करने का अधिकार: ED के पास किसी भी ऐसी संपत्ति को अटैच (कुर्क) करने का अधिकार है, जिसके बारे में उसे संदेह है कि वह अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) से बनाई गई है। खास बात यह है कि संपत्ति जब्त करने के लिए ED को कोर्ट में दोष साबित होने का इंतजार नहीं करना पड़ता। जांच के दौरान ही संपत्ति जब्त की जा सकती है।

गिरफ्तारी का अधिकार और जमानत

PMLA के तहत ED को गिरफ्तारी के व्यापक अधिकार मिले हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि PMLA के मामलों में जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है। इसमें दो शर्तें लागू होती हैं। पहली यह कि पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को जमानत का विरोध करने का मौका मिलना चाहिए। दूसरी यह कि कोर्ट को यह विश्वास होना चाहिए कि आरोपी निर्दोष है और जमानत पर रिहा होकर वह अपराध नहीं करेगा।

आपने कई बार यह देखा होगा कि ED अधिकारियों के शिकंजे में फंसे बड़े-बड़े मंत्री और नेता महीनों ही नहीं, बल्कि सालों तक जेल में रहते हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंदे केजरीवाल को आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED ने 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। तमाम कानूनी दांवपेंच के बावजूद उन्हें 12 जुलाई को इस मामले में जमानत मिल सकती थी।

आरोपी के ऊपर सबूत का बोझ: आम* आम आपराधिक मामलों में ‘निर्दोष जब तक कि दोषी साबित न हो’ (Innocent until proven guilty) का सिद्धांत चलता है और जांच एजेंसी को दोष साबित करना होता है। लेकिन PMLA के कुछ मामलों में ‘बर्डन ऑफ प्रूफ’ आरोपी पर होता है। यानी आरोपी को यह साबित करना पड़ता है कि उसका पैसा या संपत्ति वैध (White Money) है, न कि अवैध।

प्रवर्तन निदेशालय की शक्ति का विकास (इन्फोग्राफिक- AI)

2018 में मिल गई एक और बड़ी ताकत

साल 2018 में केंद्र की मोदी सरकार ने एक और कानून ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEOA) पारित किया। जिसका उद्देश आर्थिक अपराधियों को देश से भागने से रोकना था। इस कानून के तहत भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्तियों को जब्त करने की शक्ति भी मिल गई।

खुफिया एजेंसी की तरह करती है काम*म

ED एक खुफिया एजेंसी की तरह भी काम करती है और एक जांच एजेंसी की तरह भी। इसके काम करने का तरीका पुलिस या सीबीआई से थोड़ा अलग है। यह खुद सीधे तौर पर कोई FIR नहीं दर्ज करती है। लेकिन पुलिस या सीबीआई अगर कोई भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी या तस्करी का केस दर्ज करती है तो ED उस मामले का संज्ञान लेते हुए अपनी रिपोर्ट खुद दर्ज करती है। इस रिपोर्ट को ECIR (Enforcement Case Information Report) कहा जाता है।

CBI से ख़तरनाक क्यों है ED?



के तहत विनिमय नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन को रोकना था। आसान शब्दों में कहें तो, इसका काम यह देखना था कि देश से विदेशी मुद्रा बाहर न जाए और विदेशी मुद्रा से जुड़े कानूनों का पालन हो। तब तक ED को इतना गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था।


कैसे दो शहरों से देशभर में फैला जाल?


शुरुआत में बॉम्बे और कलकत्ता (अब मुंबई और कोलकाता) में ही इसके दफ्तर थे। लेकिन आज इसका जाल पूरे देश में फैल चुका है। साल 1960 में इसके प्रशासनिक नियंत्रण को आर्थिक मामलों के विभाग से राजस्व विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया, और तब से यह इसी विभाग का हिस्सा है। यहां से इसकी शक्तियों में थोड़ा सा इजाफा हो गया।


अटल सरकार ने ED को दिया ब्रह्मास्त्र


साल 1999 की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 (FEMA) पारित किया। इस कानून ने ED के आधार को और मजूबत किया। लेकिन अब भी वह इतनी पॉवरफुल नहीं थी कि सियासी रसूखदारों पर सीधी कार्रवाई कर सके। लेकिन 3 साल बाद ही सरकार ने ‘धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA)’ पारित करते हुए ED को ‘ब्रह्मास्त्र’ दे दिया।


PMLA क्यों बनाता ED को सुपरपॉवर?


ED के सामने इकबालिया बयान: यह ED की सबसे बड़ी ताकत है। सामान्य पुलिस केस में, पुलिस के सामने दिया गया आरोपी का बयान कोर्ट में सबूत नहीं माना जाता। लेकिन PMLA की धारा 50 के तहत, ED अधिकारी के सामने दिया गया बयान कोर्ट में सबूत (Admissible Evidence) माना जाता है। यानी, अगर आरोपी ने पूछताछ में गुनाह कबूल कर लिया, तो वह कोर्ट में उसके खिलाफ इस्तेमाल होगा।

संपत्ति जब्त करने का अधिकार: ED के पास किसी भी ऐसी संपत्ति को अटैच (कुर्क) करने का अधिकार है, जिसके बारे में उसे संदेह है कि वह अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) से बनाई गई है। खास बात यह है कि संपत्ति जब्त करने के लिए ED को कोर्ट में दोष साबित होने का इंतजार नहीं करना पड़ता। जांच के दौरान ही संपत्ति जब्त की जा सकती है।

गिरफ्तारी का अधिकार और जमानत: PMLA के तहत ED को गिरफ्तारी के व्यापक अधिकार मिले हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि PMLA के मामलों में जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है। इसमें दो शर्तें लागू होती हैं। पहली यह कि पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को जमानत का विरोध करने का मौका मिलना चाहिए। दूसरी यह कि कोर्ट को यह विश्वास होना चाहिए कि आरोपी निर्दोष है और जमानत पर रिहा होकर वह अपराध नहीं करेगा।

आपने कई बार यह देखा होगा कि ED अधिकारियों के शिकंजे में फंसे बड़े-बड़े मंत्री और नेता महीनों ही नहीं, बल्कि सालों तक जेल में रहते हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंदे केजरीवाल को आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED ने 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। तमाम कानूनी दांवपेंच के बावजूद उन्हें 12 जुलाई को इस मामले में जमानत मिल सकती थी।


आरोपी के ऊपर सबूत का बोझ: आम आपराधिक मामलों में ‘निर्दोष जब तक कि दोषी साबित न हो’ (Innocent until proven guilty) का सिद्धांत चलता है और जांच एजेंसी को दोष साबित करना होता है। लेकिन PMLA के कुछ मामलों में ‘बर्डन ऑफ प्रूफ’ आरोपी पर होता है। यानी आरोपी को यह साबित करना पड़ता है कि उसका पैसा या संपत्ति वैध (White Money) है, न कि अवैध।

 

प्रवर्तन निदेशालय की शक्ति का विकास (इन्फोग्राफिक- AI)


2018 में मिल गई एक और बड़ी ताकत


साल 2018 में केंद्र की मोदी सरकार ने एक और कानून ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEOA) पारित किया। जिसका उद्देश आर्थिक अपराधियों को देश से भागने से रोकना था। इस कानून के तहत भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्तियों को जब्त करने की शक्ति भी मिल गई।


*खुफिया एजेंसी की तरह करती है काम*


ED एक खुफिया एजेंसी की तरह भी काम करती है और एक जांच एजेंसी की तरह भी। इसके काम करने का तरीका पुलिस या सीबीआई से थोड़ा अलग है। यह खुद सीधे तौर पर कोई FIR नहीं दर्ज करती है। लेकिन पुलिस या सीबीआई अगर कोई भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी या तस्करी का केस दर्ज करती है तो ED उस मामले का संज्ञान लेते हुए अपनी रिपोर्ट खुद दर्ज करती है। इस रिपोर्ट को ECIR (Enforcement Case Information Report) कहा जाता है।


*CBI से ख़तरनाक क्यों है ED?*



रिपोर्ट दर्ज करने के बाद ED मनी ट्रेल की तलाश करती है। दूसरी पुलिस या CBI भ्रष्टाचार की जांच करती है। जबकि ED उस भ्रष्टाचार से बनाई गई काली कमाई को कहां छिपाया गया, उसे ‘व्हाइट मनी’ कैसे बनाया गया इसकी खोज करती है। इसी तलाश के लिए वह छापेमारी और पूछताछ भी करती है।


*मुश्किल में फंसेंगी सीएम ममता बनर्जी?*


बात करें ED की कार्रवाई के बीच से सीएम ममता बनर्जी द्वारा फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस को लेकर जाने के मामले की तो यह ममता बनर्जी पर भारी पड़ सकता है। हालांकि अब यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंच चुका है। दोनों ही तरफ से याचिकाएं दायर की गई हैं।



कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बात अब पूरी तरह अदालत पर निर्भर करती है कि वह क्या कुछ फैसला देती है। क्योंकि ममता बनर्जी ने भी ED पर चुनावी रणनीति और दस्तावेज जब्त करने का आरोप लगाया है। ऐसे में ममता को अदालत में यह साबित करना होगा कि जो दस्तावेज वो लेकर आई हैं वो चुनाव से जुड़े हैं। जबकि, ED को भी अदालत को भरोसा दिलाना होगा कि ममता बनर्जी जो फाइल्स लेकर गई हैं उनमें मनी ट्रेल के सुबूत हैं।

लंबित फाइलों के पीछे इंतजार करता इंसाफ, SP निधि ने दिए सख्त निर्देश

झारखंड : मालपहारी ओपी की सुबह आम दिनों जैसी ही थी। आंगन में खड़ी कुर्सियां, दीवारों पर टंगे नोटिस और मेजों पर सजे मोटे मोटे रजिस्टर। लेकिन 09 जनवरी की यह सुबह पुलिसकर्मियों के लिए खास थी। पाकुड़ की पुलिस कप्तान निधि द्विवेदी वार्षिक निरीक्षण पर यहां पहुंची थीं। यह निरीक्षण केवल नियम और कागजों तक सीमित नहीं था, बल्कि उस भरोसे को परखने की कोशिश थी, जो आम लोग पुलिस से जोड़कर देखते हैं।

साफ परिसर, व्यवस्थित अभिलेख

निरीक्षण की शुरुआत ओपी परिसर और भवन की साफ सफाई से हुई। SP ने पूरे परिसर का मुआयना किया और व्यवस्थाओं को करीब से देखा। इसके बाद उन्होंने ओपी में संधारित दागी पंजी, प्राथमिकी पंजी, लूट और डकैती पंजी, अपराध निर्देशिका, खतियान और गिरफ्तारी पंजी जैसे महत्वपूर्ण अभिलेखों को एक एक कर देखा। रजिस्टरों की स्थिति संतोषजनक पाई गई, जो यह बताती है कि यहां कागजों के साथ जिम्मेदारी भी संभाली जा रही है।

छोटी कमियां, बड़े संकेत

निरीक्षण के दौरान कुछ छोटी तकनीकी कमियां भी सामने आईं। पुलिस कप्तान ने इन्हें केवल नोट नहीं किया, बल्कि मौके पर ही सुधार के निर्देश दिए। उनका मानना था कि छोटी चूकें ही कई बार बड़ी परेशानी बन जाती हैं, खासकर तब जब मामला किसी पीड़ित की उम्मीदों से जुड़ा हो।

लंबित मामलों के पीछे इंतजार करती आंखें

मालपहारी ओपी में दर्ज लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए माहौल थोड़ा गंभीर हो गया। हर फाइल के पीछे किसी न किसी परिवार की चिंता और न्याय की आस जुड़ी है। SP ने ओपी प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित कांडों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उनका जोर इस बात पर था कि न्याय केवल दर्ज होना ही नहीं, समय पर मिलना भी उतना ही जरूरी है।

भरोसे की डोर मजबूत करने की कोशिश

निरीक्षण के अंत में SP ने अधिकारियों और कर्मियों से बातचीत की। संदेश साफ था कि पुलिस व्यवस्था का मकसद केवल कानून का पालन कराना नहीं, बल्कि आम लोगों के मन में सुरक्षा और भरोसे की भावना पैदा करना है। मालपहारी ओपी का यह निरीक्षण उसी भरोसे की डोर को और मजबूत करने की एक कोशिश बनकर सामने आया।

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