एलबीएसएम कॉलेज के प्राचार्य और हिंदी एवं मैथिली के जाने-माने साहित्यकार डॉक्टर अशोक अविचल ने पश्चिम बंग हिंदी अकादमी द्वारा आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में उद्घाटन सत्र के अतिथि एवं राजकमल पर केंद्रित सत्र के अध्यक्ष के रुप में प्रभावी हस्तक्षेप किया।
छायावाद की सशक्त हस्ताक्षर महादेवी वर्मा एवं अकविता आन्दोलन के प्रतिषठापकों में से एक राजकमल की आवृति एवं विमर्श पर आधारित इस संगोष्ठी में देश भर के विद्वानों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित किया। 15 शोध आलेखों की भी प्रस्तुति हुई। 25 युवक-युवतियों ने आवृत्ति पाठ किया।
डॉक्टर अविचल ने अकविता आन्दोलन के परिवेश, प्रभाव एवं राजकमल के योगदान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, मैथिली हो या हिंदी साहित्य राजकमल दोनों साहित्य के रचनाधर्मिता को आलोड़ित करते हैं।आप उनसे असहमत तो हो सकते हैं पर उनके साहित्य की उपेक्षा नहीं कर सकते हैं।।
संगोष्ठी का संयोजन बंग हिंदी अकादमी के वरिष्ठ सदस्य डा अशोक झा ने किया।









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