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शनिवार, 10 जनवरी 2026

लंबित फाइलों के पीछे इंतजार करता इंसाफ, SP निधि ने दिए सख्त निर्देश

झारखंड : मालपहारी ओपी की सुबह आम दिनों जैसी ही थी। आंगन में खड़ी कुर्सियां, दीवारों पर टंगे नोटिस और मेजों पर सजे मोटे मोटे रजिस्टर। लेकिन 09 जनवरी की यह सुबह पुलिसकर्मियों के लिए खास थी। पाकुड़ की पुलिस कप्तान निधि द्विवेदी वार्षिक निरीक्षण पर यहां पहुंची थीं। यह निरीक्षण केवल नियम और कागजों तक सीमित नहीं था, बल्कि उस भरोसे को परखने की कोशिश थी, जो आम लोग पुलिस से जोड़कर देखते हैं।

साफ परिसर, व्यवस्थित अभिलेख

निरीक्षण की शुरुआत ओपी परिसर और भवन की साफ सफाई से हुई। SP ने पूरे परिसर का मुआयना किया और व्यवस्थाओं को करीब से देखा। इसके बाद उन्होंने ओपी में संधारित दागी पंजी, प्राथमिकी पंजी, लूट और डकैती पंजी, अपराध निर्देशिका, खतियान और गिरफ्तारी पंजी जैसे महत्वपूर्ण अभिलेखों को एक एक कर देखा। रजिस्टरों की स्थिति संतोषजनक पाई गई, जो यह बताती है कि यहां कागजों के साथ जिम्मेदारी भी संभाली जा रही है।

छोटी कमियां, बड़े संकेत

निरीक्षण के दौरान कुछ छोटी तकनीकी कमियां भी सामने आईं। पुलिस कप्तान ने इन्हें केवल नोट नहीं किया, बल्कि मौके पर ही सुधार के निर्देश दिए। उनका मानना था कि छोटी चूकें ही कई बार बड़ी परेशानी बन जाती हैं, खासकर तब जब मामला किसी पीड़ित की उम्मीदों से जुड़ा हो।

लंबित मामलों के पीछे इंतजार करती आंखें

मालपहारी ओपी में दर्ज लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए माहौल थोड़ा गंभीर हो गया। हर फाइल के पीछे किसी न किसी परिवार की चिंता और न्याय की आस जुड़ी है। SP ने ओपी प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित कांडों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उनका जोर इस बात पर था कि न्याय केवल दर्ज होना ही नहीं, समय पर मिलना भी उतना ही जरूरी है।

भरोसे की डोर मजबूत करने की कोशिश

निरीक्षण के अंत में SP ने अधिकारियों और कर्मियों से बातचीत की। संदेश साफ था कि पुलिस व्यवस्था का मकसद केवल कानून का पालन कराना नहीं, बल्कि आम लोगों के मन में सुरक्षा और भरोसे की भावना पैदा करना है। मालपहारी ओपी का यह निरीक्षण उसी भरोसे की डोर को और मजबूत करने की एक कोशिश बनकर सामने आया।

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