Advertisement

Advertisement

Advertisement

शनिवार, 10 जनवरी 2026

आधी रात सुलग उठा ईरान : खामनेई के खिलाफ विद्रोह, जेन जी ने जमाया कब्जा

नयी दिल्ली :ईरान एक बार फिर इतिहास के ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां सड़कों पर गूंजते नारे सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि 47 साल पुराने इस्लामिक शासन की वैधता को सीधी चुनौती दे रहे हैं। बीते 11 दिनों से जारी जन-आंदोलन ने यह साफ कर दिया है कि यह केवल रोटी-रोज़गार का सवाल नहीं रहा, बल्कि सत्ता परिवर्तन की आहट बन चुका है। 



हिंसा की आग में जल रहे सभी प्रांत

28 दिसंबर 2025 को तेहरान के बाज़ारों से उठी असंतोष की चिंगारी देखते-देखते पूरे देश में आग बनकर फैल गई। ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक निचले स्तर पर है, महंगाई 40 प्रतिशत के पार जा चुकी है, और युवाओं में बेरोज़गारी 25 प्रतिशत के आसपास मंडरा रही है। जनता का गुस्सा स्वाभाविक था, लेकिन शासन की सख्ती ने इस असंतोष को विद्रोह में बदल दिया।

 अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, आंदोलन ईरान के सभी 31 प्रांतों के 111 शहरों तक फैल चुका है। अब तक कम से कम 34 प्रदर्शनकारी और चार सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं, जबकि 2,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कई जगहों पर हिंसक झड़पों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जो शासन की घबराहट और जनता के आक्रोश दोनों को उजागर करते हैं।

0 Comments:

एक टिप्पणी भेजें

Breaking