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Saubhagya Bharat News

हम सौभाग्य भारत देश और दुनिया की महत्वपूर्ण एवं पुष्ट खबरें उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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The Saubhagya Bharat

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गुरुवार, 15 जनवरी 2026

कंपकंपाती ठंड और 12 रातें, पुआल पर सोते रहे मासूम अंश और अंशिका

रांची के धुर्वा इलाके से लापता हुए अंश और अंशिका के चेहरे पर मुस्कान लौटने में पूरे 12 दिन लगे। इन 12 दिनों में न जाने कितनी रातें ऐसी रहीं, जब दोनों मासूम पुआल के बिस्तर पर एक दूसरे से सटकर सोते रहे। उन्हें शायद यह भी ठीक से समझ नहीं था कि वे अपने घर से इतनी दूर कैसे आ गए। झारखंड पुलिस उन्हें ढूंढने के लिए कई राज्यों में छापेमारी कर रही थी। हर थाने, हर चौकी में उनकी तस्वीरें पहुंच चुकी थीं। इस बीच दो छोटे बच्चे रामगढ़ के एक स्लम इलाके में ऐसे रह रहे थे, जैसे किसी और की दुनिया में आ गए हों।

मम्मी पापा कहने की मजबूरी

सूर्या और उसकी पत्नी सोनम उर्फ सोनी बच्चों के साथ ऐसे घुलमिल गए थे कि अंश और अंशिका उन्हें मम्मी पापा कहने लगे। यह शब्द उनके मुंह से मजबूरी में निकले या आदत में, यह अब भी सवाल है। आसपास के लोगों को कभी शक नहीं हुआ, क्योंकि बच्चों की हंसी और खेल सब कुछ सामान्य दिख रहा था। जब दंपत्ति काम पर निकलता, तो दोनों बच्चे मकान मालकिन रोशन आरा के घर में खेलते रहते। रोशन आरा के लिए वे सिर्फ दो मासूम बच्चे थे, जिन्हें घर की छत मिली हुई थी।

हजार रुपये किराया और एक झूठी कहानी

रोशन आरा बताती हैं कि सूर्या ने खुद को बिहार के औरंगाबाद का निवासी बताया था। कहा था कि अतिक्रमण अभियान में घर टूट गया, सिर छुपाने की कोई जगह नहीं बची। बच्चों का चेहरा देखकर उन्होंने ज्यादा सवाल नहीं किए। हजार रुपये महीने के किराए पर कमरा दे दिया। उन्हें क्या पता था कि यह कमरा किसी और के बच्चों की कैदगाह बन जाएगा।

कमरे के अंदर छुपा एक और सच

जब रामगढ़ एसपी अजय कुमार पुलिस टीम के साथ उस कमरे में पहुंचे, तो तस्वीर बदल गई। पुआल बिछा हुआ था, वहीं बच्चे सोते थे। एक कोने में रखा सूटकेस खुला तो उसमें बच्ची के कपड़ों के साथ कई आधार कार्ड मिले। अलग अलग नाम, अलग पहचान। उस एक सूटकेस ने कहानी को और गहरा बना दिया।

मासूमियत बनाम साजिश

अंश और अंशिका को शायद इन कागजों, इन झूठी पहचान और इस भागदौड़ की कोई समझ नहीं थी। उनके लिए दुनिया वहीं थी, जहां शाम को सूर्या लौटता था और सोनम उन्हें गोद में उठा लेती थी। लेकिन पुलिस के लिए यह बच्चों को छुपाने की एक सोची समझी साजिश थी।

अब सुरक्षित हैं, पर सवाल बाकी हैं

आज अंश और अंशिका सुरक्षित हैं। पुलिस की निगरानी में हैं और धीरे धीरे अपने असली घर की ओर लौट रहे हैं। लेकिन कई सवाल अब भी हवा में हैं। इतने आधार कार्ड क्यों थे, बच्चों को क्यों छुपाया गया, और इस कहानी में कौन कौन शामिल था। इन सवालों के जवाब जांच में मिल जाएंगे। फिलहाल राहत सिर्फ इतनी है कि दो मासूम अब पुआल के बिस्तर पर नहीं, बल्कि सुरक्षा की छांव में सो रहे हैं।

पत्नी ने चार लाख में तय किया था पति की सांसों का सौदा, आशिक को दी थी सुपारी

राँची: रांची के सिल्ली इलाके में 7 जनवरी की वह शाम आम दिनों जैसी ही थी। सड़क किनारे चाउमिन की दुकान से उठती खुशबू लोगों को खींच रही थी। हराधन महतो रोज की तरह अपनी दुकान पर खड़े ग्राहकों को चाउमिन परोस रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह रोजमर्रा की जिंदगी अचानक खून और साजिश की कहानी में बदलने वाली है।

एक गोली और बदल गई पूरी जिंदगी

शाम के वक्त अचानक गोलियों की आवाज गूंजी। हराधन महतो जमीन पर गिर पड़े। लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही अफरा-तफरी मच गई। खून से लथपथ हराधन को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। दुकान, जो परिवार की रोजी-रोटी थी, उसी जगह अब खामोशी पसरी हुई है।

बीवी बनी सबसे बड़ी कड़ी

पुलिस जब जांच में जुटी तो शक की सुई घर के अंदर ही घूमने लगी। हराधन की पत्नी गंगा देवी के बयानों में बार-बार विरोधाभास सामने आ रहा था। धीरे-धीरे परतें खुलीं और जो सच सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया। जिस पत्नी से हराधन ने जीवन भर साथ निभाने की उम्मीद की थी, वही उसकी जान की दुश्मन बन गई।

प्रेम, लालच और हत्या की योजना

जांच में पता चला कि गंगा देवी का कंचन महतो से प्रेम संबंध था। दोनों ने मिलकर हराधन को रास्ते से हटाने की साजिश रची। चार लाख रुपये में पति की सांसों का सौदा तय हो गया। सुपारी की रकम गंगा देवी ने अपने आशिक कंचन महतो को दे दी। इसके बाद तमाड़ के रहने वाले सुनील और तारकेश्वर महतो को इस काम में शामिल किया गया। पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन हराधन कहां होंगे, कब दुकान पर रहेंगे, इसकी पूरी जानकारी गंगा देवी ने ही आरोपियों को दी थी।

पुलिस जांच ने खोले कई राज

रांची के एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर गठित एसआईटी ने कड़ी पूछताछ की। कंचन महतो ने अपराध स्वीकार किया और पूरी साजिश का खुलासा किया। इसके बाद एक-एक कर सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए। उनके पास से देसी कट्टा और जिंदा गोली भी बरामद हुई।

IND vs NZ 2nd ODI : हार गया भारत

भारत बनाम न्यूज़ीलैंड वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला न्यूज़ीलैंड ने 7 विकेट से जीत लिया। भारत के द्वारा दिए गए 285 रन का टारगेट चेज़ करती हुई कीवी टीम ने 47.3 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 286 रन बनाए। कॉनवे 16, हेनरी 10 और विल यंग 87 रन बनाकर आउट हुए। डेरिल मिचेल 131 और ग्लेन फिलिप्स 32 रन बनाकर नाबाद रहे। यह न्यूज़ीलैंड का भारत में सबसे बड़ा रन चेज है।       


       हर्षित राणा, प्रसिद्ध कृष्णा और कुलदीप ने 1-1 विकेट लिए। सीरीज में दोनों देश 1-1 की बराबरी पर आ गए हैं। 18 जनवरी को इंदौर में आख़िरी और निर्णायक मुकाबला खेला जाएगा।

झारखंड में फिर बढ़ेगी ठंड, 12 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी

 रांची  :  झारखंड में सोमवार को न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की हल्की बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई, लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक रहने वाली नहीं है। राज्य के लगभग सभी जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के आसपास पहुंच गया, हालांकि गुमला सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार से तापमान में एकाएक गिरावट आने की संभावना है। विभाग ने चेतावनी दी है कि तापमान 4 डिग्री तक गिर सकता है, जिससे राज्य में कड़ाके की ठंड और तेज शीतलहर का असर साफ तौर पर महसूस होगा। खासकर सुबह और रात के समय ठिठुरन बढ़ने की आशंका है।

मौसम विभाग ने बताया है कि 13 जनवरी से 17 जनवरी तक झारखंड में जबरदस्त शीतलहर चलेगी। इस दौरान कई जिलों में घना कोहरा छाया रहेगा और तापमान में 4 से 5 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। 13 जनवरी को रांची, खूंटी, पलामू, हजारीबाग, रामगढ़, लातेहार, लोहरदगा, पाकुड़ और सरायकेला-खरसावां में ठंड का असर ज्यादा रहने की संभावना है। इन जिलों में न्यूनतम तापमान 2 से 6 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

ठंड और शीतलहर को देखते हुए मौसम विभाग ने झारखंड के 12 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इनमें रांची, खूंटी, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, रामगढ़, बोकारो, सरायकेला-खरसावां, चतरा, गढ़वा और गुमला शामिल हैं। मौसम विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने और ठंड से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने की अपील की है।

मकर संक्रांति पर बन्ना गुप्ता एवं सुधा गुप्ता ने दी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ

 

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता एवं श्रीमती सुधा गुप्ता ने कदमा स्थित अपने आवास पर पारंपरिक गुड़–चूड़ा एवं दही ग्रहण कर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक एकता, सामाजिक समरसता एवं श्रम के सम्मान का प्रतीक है। यह पर्व समाज को आपस में जोड़ने तथा परंपराओं के संरक्षण का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति एवं टुसू परब जैसी लोक परंपराएँ हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव को दर्शाती हैं और जीवन की सादगी, सहयोग एवं आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करती हैं।

इस अवसर पर श्रीमती सुधा गुप्ता ने कामना की कि यह पावन पर्व राज्य के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि एवं सौहार्द की मिठास लेकर आए।




रामपुर चौक पर “रफ्तार घटाओ, सुरक्षा बढ़ाओ” थीम पर चला सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान

 


सड़क सुरक्षा माह 2026 के अंतर्गत गुरुवार को रामपुर चौक के समीप जिला प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान जिला परिवहन पदाधिकारी, दुमका एवं मोटरयान निरीक्षक, दुमका के संयुक्त नेतृत्व में “रफ्तार घटाओ, सुरक्षा बढ़ाओ” थीम पर आयोजित किया गया।

अभियान के दौरान आम नागरिकों एवं वाहन चालकों को यातायात नियमों की विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों द्वारा सुरक्षित गति से वाहन चलाने, दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन चालकों को सीट बेल्ट लगाने तथा नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान जिला परिवहन पदाधिकारी, दुमका एवं मोटरयान निरीक्षक दुमका द्वारा नियमों का उल्लंघन कर रहे वाहनों में लगे प्रतिबंधित लाइट एवं प्रेशर हॉर्न को मौके पर ही हटवाया गया, जिससे सड़क पर चल रहे अन्य लोगों को होने वाली असुविधा को रोका जा सके। साथ ही जरूरतमंद वाहन चालकों को नि:शुल्क हेलमेट भी प्रदान किए गए।

अधिकारियों ने बताया कि तेज रफ्तार सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है, जिसे नियंत्रित कर ही दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है, जबकि नियमों का पालन जीवन की रक्षा करता है।

इस अवसर पर सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य, यातायात से जुड़े पदाधिकारी एवं कई समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में आम जनता से अपील की है कि वे स्वयं यातायात नियमों का पालन करें तथा दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें। अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि थोड़ी सी सावधानी, नियंत्रित गति और नियमों का पालन कर अनमोल जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता है। 




मकर संक्रांति पर नेत्रहीन विद्यालय में रोटी बैंक ने दही-चूड़ा व तिलकुट का वितरण

 

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सामाजिक संस्था रोटी बैंक के द्वारा आज 15 जनवरी को नेत्रहीन विद्यालय में दही-चूड़ा एवं तिलकुट का वितरण किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के नेत्रहीन छात्र-छात्राओं के बीच पारंपरिक एवं पौष्टिक भोजन वितरित कर पर्व की खुशियां साझा की गईं।

कार्यक्रम के दौरान रोटी बैंक के संस्थापक जतिन कुमार ने बच्चों के साथ समय बिताया और मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डाला। संस्था की ओर से जतिन ने कहा की पर्व समाज को आपसी भाईचारे, सेवा और समर्पण की भावना से जोड़ते हैं। नेत्रहीन बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह देखने लायक था।

रोटी बैंक ने यह संकल्प दोहराया कि भविष्य में भी जरूरतमंदों, विशेषकर दिव्यांग और वंचित वर्ग के लिए इस तरह के सेवा कार्यक्रम लगातार जारी रहेंगे। विद्यालय प्रशासन ने रोटी बैंक के इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।

यह आयोजन न केवल मकर संक्रांति के पर्व को सार्थक बनाने वाला रहा, बल्कि समाज में सेवा और संवेदना का संदेश भी देने वाला साबित हुआ। इस अवसर पर सहायक अवर निरीक्षक मुन्ना सिंह, समाजसेवी अंकित कुमार गुप्ता, दांत चिकित्सा डॉक्टर श्वेता स्वराज नेत्रहीन विद्यालय के प्रचार है शिवनाथ महतो आदि मौजूद थे 



नौ अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को जल्द हरी झंडी देगा केंद्र

केंद्र सरकार ने बताया है कि पश्चिम बंगाल और असम से नौ नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें जल्द ही शुरू की जाएंगी। इन ट्रेनों के परिचालन से आधुनिक और किफायती रेल सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और देश के विभिन्न हिस्सों के बीच लंबी दूरी की कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।

रेल मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि ये ट्रेनें असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरने वाले प्रमुख रूट्स पर चलाई जाएंगी। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां प्रवासी मजदूरों और लंबी दूरी की रेल यात्रियों की संख्या अधिक है। नई सेवाओं से विशेष रूप से त्योहारों और भीड़भाड़ वाले समय में यात्रियों को भरोसेमंद, किफायती और आरामदायक यात्रा विकल्प मिलेगा।

नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे घनी आबादी वाले राज्यों के साथ-साथ तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे दूर-दराज के राज्यों को भी जोड़ेंगी। इससे रेल यात्रा की बढ़ती मांग को संतुलित करने में मदद मिलेगी और देशभर में आवागमन को गति मिलेगी।



प्रस्तावित अमृत भारत एक्सप्रेस रूट:

गुवाहाटी (कामाख्या) – रोहतक

डिब्रूगढ़ – लखनऊ (गोमती नगर)

न्यू जलपाईगुड़ी – नागरकोइल

न्यू जलपाईगुड़ी – तिरुचिरापल्ली

अलीपुरद्वार – एसएमवीटी बेंगलुरु

अलीपुरद्वार – मुंबई (पनवेल)

कोलकाता (संतरागाछी) – तांबरम

कोलकाता (हावड़ा) – आनंद विहार टर्मिनल

कोलकाता (सियालदह) – बनारस

रेल मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रेलवे किफायती और लंबी दूरी की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी दिशा में अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाएं शुरू की गई हैं, जो रोज़मर्रा के यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई हैं।

अमृत भारत एक्सप्रेस को अमृत काल की एक विशेष पहल के रूप में शुरू किया गया है। ये ट्रेनें नॉन-एसी लंबी दूरी की स्लीपर यात्रा की सुविधा देती हैं, जिनका किराया लगभग 500 रुपये प्रति 1000 किलोमीटर है। किराया संरचना सरल और पारदर्शी है तथा इसमें डायनामिक प्राइसिंग लागू नहीं की गई है, जिससे यह आम यात्रियों के लिए अधिक सुलभ बनती है।

दिसंबर 2023 में शुरुआत के बाद से अब तक 30 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें संचालित की जा चुकी हैं। आगामी नौ नई सेवाओं के जुड़ने से पूर्वी और उप-हिमालयी क्षेत्रों से लेकर दक्षिणी, पश्चिमी और मध्य भारत के प्रमुख गंतव्यों तक रेल कनेक्टिविटी को नया विस्तार मिलेगा।

राँची: ठंडी पछुआ हवाओं ने बढ़ाई कंपकंपी, दो दिन बाद मिल सकती है राहत

राँची: झारखंड में अभी भी भीषण ठंड का कहर जारी है। सुबह के समय कनकनी और ठिठुरन बनी हुई है, जबकि हल्का कोहरा भी छाया रहता है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों तक शीतलहर का असर रहेगा, लेकिन इसके बाद ठंड में कमी आने की उम्मीद है।

पिछले 24 घंटों में राज्य के ज्यादातर जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। गुमला सबसे ठंडा जिला रहा, जहां तापमान गिरकर 1.8 डिग्री तक पहुंच गया। राजधानी रांची में न्यूनतम तापमान 8 से 10 डिग्री के बीच रहा, जहां पिछले दिन की तुलना में करीब 1 डिग्री की बढ़ोतरी हुई, लेकिन ठंड का असर अब भी तेज है। ठंडी पछुआ हवाएं 4 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं, जिससे ठंड और ज्यादा महसूस हो रही है।



मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर अभी दिख रहा है। अगले एक-दो दिनों में तापमान में 3 डिग्री तक और गिरावट आ सकती है। लेकिन दो दिनों के बाद पछुआ हवाओं के प्रभाव से न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। खासकर संताल परगना और आसपास के इलाकों में ठंड की तीव्रता कम होने की संभावना है।

राज्य के 13 जिलों में शीतलहर को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में गढ़वा, पलामू, लातेहार, चतरा, लोहरदगा, रांची, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, गुमला, खूंटी, सिमडेगा और पश्चिम सिंहभूम शामिल हैं। फिलहाल पूरी राहत नहीं मिली है, लेकिन मौसम विभाग के अनुमान से उम्मीद जगी है कि दो दिन बाद झारखंडवासियों को इस भीषण सर्दी से कुछ सुकून मिलेगा। लोगों को सलाह दी जा रही है कि ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनें और जरूरी सावधानियां बरतें।

दरभंगा की अंतिम महारानी नहीं रही, 600 किलो सोना दान क्यों किया

बिहार : दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी अब इस दुनिया में नहीं रहीं। 94 वर्ष की उम्र में उनके निधन के साथ मिथिला की शाही परंपरा का अंतिम जीवंत अध्याय भी इतिहास बन गया। देश उन्हें सिर्फ एक महारानी के रूप में नहीं, बल्कि सच्चे त्याग, मौन राष्ट्रभक्ति और दान की मिसाल के तौर पर याद करेगा। शोर-शराबे से दूर कर्तव्य को धर्म मानकर जीने वाली कामसुंदरी देवी ने यह साबित किया कि सत्ता से बड़ी संवेदना होती है। वहीं, वैभव से बड़ा होता है बलिदान। उनका जाना एक व्यक्तित्व का नहीं, बल्कि एक युग का अवसान है, जो हमेशा भारतीय स्मृति में जीवित रहेगा। दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी अब स्मृतियों में हैं। बीते 12 जनवरी को उनके निधन के साथ मिथिला की शाही परंपरा का अंतिम जीवंत अध्याय भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। वे ऐसी महारानी थीं, जिनकी पहचान सत्ता के शोर से नहीं, कर्तव्य की मौन शक्ति से बनी। सार्वजनिक जीवन से भले ही वे अंतिम वर्षों में दूर रहीं, लेकिन बिहार और देश की सांस्कृतिक चेतना में उनका स्थान कभी फीका नहीं पड़ा। आज उन्हें सिर्फ एक महारानी नहीं, बल्कि त्याग, दान, मर्यादा, नेतृत्व और मौन राष्ट्रभक्ति के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।



महारानी कामसुंदरी देवी स्वर्गीय महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की धर्मपत्नी थीं। उस दौर में दरभंगा राजघराने में आईं

जब राजशाही ढलान पर थी और लोकतंत्र का सूरज उग रहा था, सत्ता में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रही, लेकिन उन्होंने परंपरा, मर्यादा और सामाजिक उत्तरदायित्व को पूरी गरिमा के साथ निभाया। वे उस मिथिला संस्कृति की प्रतिनिधि थीं, जहां शिक्षा, दान और लोककल्याण को ही राजधर्म माना जाता था। महारानी कामसुंदरी देवी के निधन के साथ दरभंगा राज की शाही परंपरा अब इतिहास की धरोहर बन गई है।

600 किलो सोने का त्याग: भारतीय इतिहास में महारानी कामसुंदरी देवी का नाम 1962 के भारत-चीन युद्ध से अमर हो गया। जब देश संसाधनों की कमी और राष्ट्रीय संकट से जूझ रहा था, तब दरभंगा राज की ओर से 600 किलोग्राम सोना भारत सरकार को दान किया गया। यह दान सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं था, बल्कि डगमगाते राष्ट्र के लिये नैतिक संबल भी था। एक ऐसी राष्ट्रभक्ति, जो बिना भाषण के अपने आप बोल उठी। शाही जीवन होने के बावजूद महारानी कामसुंदरी देवी ने सादगी को कभी नहीं छोड़ा। उनका जीवन मंत्र साफ था, “जिनके पास अधिक है, उनकी जिम्मेदारी भी अधिक है।” उन्होंने जीवनभर शिक्षा के संरक्षण के लिये, सामाजिक कल्याण के लिये और मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता के लिये काम किया।

कल्याणी फाउंडेशन और विरासत की रक्षा: महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने दरभंगा राज की शैक्षणिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित किया। यह कार्य किसी राजाज्ञा से नहीं, बल्कि सेवा-भाव से उपजे संकल्प का परिणाम था।

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