देशभर में लगातार बढ़ रहे आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मंगलवार (13 जनवरी 2026) को सुनवाई के दौरान बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि कुत्ते के काटने से घायल या मृत व्यक्तियों को राज्य सरकारों द्वारा मुआवजा दिया जाएगा।
जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग भी जिम्मेदार होंगे। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा — “कुत्तों को अपने घर ले जाइए, सड़कों पर छोड़ने से वे लोगों को काटते और डराते हैं।”
यह टिप्पणी उस समय आई जब वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने आवारा कुत्तों के मुद्दे को भावुकता से जोड़ा। इस पर अदालत ने कहा कि “भावुकता केवल कुत्तों के लिए ही नहीं, लोगों की सुरक्षा के लिए भी होनी चाहिए।”
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। इसके अलावा, सरकारी और सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई थी।
हाल के महीनों में देशभर में कुत्तों के हमलों से कई बच्चे और बुजुर्ग घायल या मृत हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को जन स्वास्थ्य और नागरिक सुरक्षा के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।
अब राज्य सरकारों को इस आदेश के अनुपालन के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे।







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