राँची : प्रतिभा न उम्र देखती है, न हालात, बस हौसला, मेहनत और जज्बा चाहिये। यही मानना है नामकुम के जोरार की रहने वाली पावर लिफ्टर पूनम मिश्रा का। पूनम ने अपने दम पर राज्य से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक झंडा लहराया है। गोल्ड पर गोल्ड हासिल करने वाली पूनम मिश्रा का चयन 10 जनवरी को वियतनाम में होने वाली वर्ल्ड पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप हुआ है। दिन-रात कड़ी मेहनत और पसीने से सपनों को पूनम सींच रहीं। घर की माली हालत बहुत बढ़िया नहीं है, पर हौसला अडिग है।
पूनम का एक ही लक्ष्य है देश के लिये पदक लेकर लौटना। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिये करीब 1 लाख रुपये (एंट्री फीस, यात्रा और ठहराव) का खर्च है। पूनम का साफ कहना है कि “अगर राज्य सरकार सहयोग करे, तो पदक तय है।” वर्तमान में पूनम खेलगांव में बच्चों को पावर लिफ्टिंग का प्रशिक्षण देती हैं। पति रामाशंकर मिश्रा निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं। 14 साल का बेटा मां की मेहनत और हिम्मत का सबसे बड़ा गवाह है। आज पूनम देश की लाखों गृहिणियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुकी हैं। Kohramlive.com के सीनियर रिपोर्टर अखिलेश कुमार से खास बातचीत में पूनम मिश्रा ने कहा कि शादी के बाद सपने खत्म नहीं होते। “मैं एक मां हूं, परिवार की जिम्मेदारियां निभाती हूं, फिर भी गोल्ड मेडल जीत सकी,क्योंकि हिम्मत नहीं हारी।” शादी महिलाओं के सपनों का अंत नहीं, बल्कि उन्हें साकार करने का नया आसमान देती है। अगर परिवार और समाज का साथ मिले, तो महिलायें नये कीर्तिमान गढ़ सकती हैं। ईश्वर ने महिलाओं को मल्टी-टास्किंग की अद्भुत क्षमता दी है, बस उसे पहचानने की जरूरत है।







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