सरायकेला प्रखंड के मुरुप और गोविंदपुर गांव के बीच स्थित संजय नदी के तट पर "ठाकुराणी दरोह" में हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी मकर संक्रांति के अवसर पर हजारों श्रद्धालु आस्था पूर्वक मकर डुबकी लगाकर माता ठाकुराणी देवी की पूजा-अर्चना करेंगे। श्रद्धालु यहां अपने और परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
मकर पूजा की परंपरा: ठाकुराणी शक्तिपीठ के मुख्य पुजारी शुक्रा सरदार ने बताया कि इस वर्ष भी 14 जनवरी 2026 को परंपरागत रूप से मकर पूजा आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां सच्चे मन से आराधना करने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
ठाकुराणी दरबार कैसे पहुंचे-
रेल मार्ग: महालीमुरुप रेलवे स्टेशन पर उतरकर मुरुप गांव के रास्ते आसानी से पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग: सरायकेला-खरसावां सड़क मार्ग पर गोविंदपुर गांव होते हुए ठाकुराणी शक्तिपीठ तक पहुंचा जा सकता है।
निशुल्क सेवा शिविर का आयोजन: मकर संक्रांति के दिन "जय मां ठाकुराणी सेवा संघ, गोविंदपुर" की ओर से निशुल्क सेवा शिविर का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति के मृत्युंजय पति ने बताया कि श्रद्धालुओं को खीर, खिचड़ी, चाय आदि निशुल्क वितरित किए जाएंगे।
साथ ही समिति के कार्यकर्ता श्रद्धालुओं के सेवा के लिए तत्पर रहेंगे।
पर्यटन स्थल बनाने की मांग: स्थानीय लोगों ने ठाकुराणी शक्तिपीठ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है। स्थानीय युवा सामाजिक कार्यकर्ता हेमसागर प्रधान ने बताया कि इस स्थल के पर्यटन स्थल में परिवर्तित होने से क्षेत्र के विकास के नए आयाम खुलेंगे और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
ठाकुराणी शक्तिपीठ की खासियतें-
संजय नदी का अनवरत प्रवाह: गर्मियों में बड़ी नदियों के सूखने के बावजूद, यहां बहने वाली संजय नदी का जल प्रवाह हमेशा बना रहता है।
निर्मल जलाशय: शक्तिपीठ के पास स्थित "ठाकुराणी दरोह" जलाशय का पानी बारहों महीने समान व निर्मल रहता है।
प्राकृतिक सौंदर्य: बड़े-बड़े चट्टानों और हरियाली से घिरा यह स्थान प्राकृतिक छटा से भरपूर है, जो इसे अनूठा बनाता है।
शक्ति पीठ: यह शक्ति पीठ धार्मिक और मनमोहक प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण होने की दृष्टि से एक विशिष्ट स्थल है, जो पर्यटन व आस्था दोनों के लिये महत्वपूर्ण है।







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