राँची : झारखंड की सियासत और जांच एजेंसियों के बीच टकराव अब हाई कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। ED अफसरों के खिलाफ रांची के एयरपोर्ट थाने में दर्ज FIR और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में ED ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया है। इस मामले में शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। ED ने हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में बड़ा इल्जाम लगाया है। याचिका में कहा गया है कि पेयजल विभाग के 23 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़े आरोपियों को बचाने की कोशिश हो रही है। रांची पुलिस की कार्रवाई को सुनियोजित साजिश बताया गया। ED अफसरों पर दर्ज FIR को जांच को पटरी से उतारने की कोशिश करार दिया गया। ED ने हाईकोर्ट से इस पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। वहीं, ED अफसरों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने और पुलिस जांच पर रोक लगाने की मांग की है। ED अधिकारियों के मुताबिक, 14 जनवरी की रात 11.30 बजे पुलिस का ईमेल आया, उसमें बताया गया कि 15 जनवरी सुबह जांच के लिये रांची पुलिस टीम आयेगी। लेकिन हैरानी की बात है कि सुबह में ही 15–20 पुलिसकर्मी ED कार्यालय पहुंच गये। जांच दिन के 4 बजे तक चली।
ED अधिकारियों ने बड़ा खुलासा किया कि संतोष कुमार बिना किसी समन के खुद 12 जनवरी को ED दफ्तर पहुंचा। पूछताछ के दौरान कांच के जग से खुद के सिर पर वार किया। घायल होने के बाद ED अधिकारियों ने ही उसका इलाज करवाया और उसका बयान भी रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने माना कि वह खुद दफ्तर आया था। ED का कहना है संतोष ने पूछताछ में कई अधिकारियों और राजनेताओं के नाम लिये थे। उसकी पत्नी को भी पूछताछ के लिये समन किया गया था। ED का इल्जाम है कि यही वजह है कि जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इधर, नाम नहीं छापने की शर्त पर रांची पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि संतोष को ED दफ्तर के अंदर मारा-पीटा गया। वह लहूलुहान हो गया। उसके कपड़े तक बदल दिये गये। ऐसा साक्ष्य छुपाने के इरादे से किया गया। ED अधिकारियों के खिलाफ एयरपोर्ट थाने में FIR दर्ज है।







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