राँची : राजधानी रांची से सटे कांके थाना क्षेत्र में 12 साल की बच्ची के अपहरण की खबर से मचे तहलके पर अब पुलिस जांच ने विराम लगा दिया है। गहराई से जांच के बाद यह साफ हो गया है कि अपहरण की कोई घटना हुई ही नहीं, पूरा मामला एक भ्रम और गलतफहमी का नतीजा था। बीते 12 जनवरी को प्रेम नगर निवासी पूनम बाखला ने अपनी 12 साल की बेटी निधि बाखला के अपहरण का आरोप लगाते हुये कांके थाना में केस (कांड संख्या 08/2026) दर्ज कराया था। इल्जाम लगाया गया था कि दो बाइक सवार लड़कों ने स्प्रे मारकर बच्ची का अपहरण करने की कोशिश की और फिर चारपहिया वाहन से ले जाने लगे, लेकिन बच्ची के चिल्लाने पर लोग जुट गये। मामले की गंभीरता को देखते हुये रांची पुलिस कप्तान के निर्देश पर रूरल SP की देखरेख में DSP (मुख्यालय-1) के नेतृत्व में स्पेशल टीम बनाई गई। गठित टीम घटनास्थल के आसपास के करीब 3 किलोमीटर तक CCTV कैमरे खंगाले।
प्रेम नगर से कांके थाना चौक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कांके, नगड़ी (कांके रिसॉर्ट के पास) तक सभी CCTV फुटेज खंगाले गये। जांच में सामने आया कि बच्ची पैदल प्रेम नगर से कांके थाना चौक होते हुये सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक गई। वहां से ऑटो (JH01CQ-8861) से वापस लौट रही थी, जांच में चौंकाने वाला सच यह सामने आया कि निधि बाखला उसी दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रैबीज का चौथा डोज लेकर मां और छोटे भाई के साथ घर लौट रही थी। डॉक्टरों के मुताबिक, “कुछ मामलों में रैबीज वैक्सीन के बाद अस्थायी रूप से मानसिक असंतुलन या भ्रम हो सकता है।” इसी प्रभाव में बच्ची कुछ समय के लिये भटक गई, हल्की बेसुध हालत में रोती मिली। एक ऑटो चालक ने बताया कि बच्ची के पास पैसे नहीं थे, रोते हुये प्रेम नगर छोड़ने की बात कही। बाजार टांड़ के पास उतारने का अनुरोध किया। पुलिस का साफ कहना है कि CCTV फुटेज, डॉक्टरों और ऑटो चालक की पूछताछ के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि निधि बाखला के अपहरण की कोई घटना घटित नहीं हुई।







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