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शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

हजारीबाग जेल ब्रेक मामला: सुरक्षा में बड़ी चूक, दो हेड वार्डन निलंबित, 18 जेलकर्मी जांच के घेरे में

हजारीबाग: झारखंड की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (जेपी कारा) से तीन आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों के फरार होने के मामले ने जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। घटना के 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बावजूद फरार कैदियों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। पुलिस संभावित ठिकानों और रिश्तेदारों के घरों पर लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन अब तक हाथ खाली हैं।



कैसे दर्ज हुआ मामला: जेल अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन के अनुसार, लोहसिंघना थाना में तीनों फरार कैदियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 224 के तहत प्राथमिकी संख्या 196/2025 दर्ज की गई है। सीसीटीवी फुटेज की जांच में सामने आया है कि बैरक नंबर-6 की खिड़की संख्या-4 की ग्रिल काटकर कैदी रात करीब 1:36 बजे से 2:45 बजे के बीच फरार हुए।

एसआईटी और फोरेंसिक जांच: घटना की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग एसपी ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। पांच अलग-अलग टीमें छापेमारी में जुटी हैं, जिनमें रांची, धनबाद के अलावा बिहार भेजी गई एक टीम भी शामिल है। फोरेंसिक विशेषज्ञ कैदियों के कॉल डिटेल्स और संपर्क नेटवर्क की पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही मामले में ठोस सफलता मिलेगी।
सुरक्षा में लापरवाही के संकेत

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कैदियों ने घने कोहरे, अंधेरे और बिजली गुल होने का फायदा उठाया। पूरी घटना सुनियोजित प्रतीत हो रही है। जेल के एक जवान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बिजली नहीं रहने और धुंध के कारण निगरानी बेहद मुश्किल हो गई थी। घटना के बाद जैप-7 के डीएसपी राजेंद्र कुमार ने जेल पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।
दो हेड वार्डन सस्पेंड

जेल प्रशासन ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए लापरवाही के आरोप में दो हेड वार्डन—हरेंद्र महतो और उमेश सिंह—को निलंबित कर दिया है। दोनों की ड्यूटी उसी वार्ड में थी, जहां से कैदी फरार हुए। इसके अलावा करीब 18 जेलकर्मी जांच के दायरे में हैं, जिन पर आगे कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
फरार कैदियों का आपराधिक रिकॉर्ड

देवा भुईया: कुख्यात अपराधी, हजारीबाग और धनबाद क्षेत्र से अच्छी तरह परिचित। 2021 में धनबाद जेल से भी फरार हो चुका है। उस पर एक दर्जन से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं और 2019 के गैंगरेप केस में दोषी है।

जीतेंद्र रवानी: भाटडीह थाना क्षेत्र में पोक्सो एक्ट के तहत मामला, 22 साल की सजा। धनबाद जेल में आत्महत्या की कोशिश कर चुका है।

राहुल रजवार: नाबालिग से जुड़े पोक्सो मामले में 2024 में जेल गया, उम्रकैद की सजा काट रहा था।

फिलहाल पुलिस फरार कैदियों के नेटवर्क और संभावित मददगारों की तलाश में जुटी है। खासकर देवा भुईया के पुराने ठिकानों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जेल सुरक्षा में हुई चूक पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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