नई दिल्ली। केंद्र सरकार जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉम्र्स पर काम करने वाले डिलीवरी बॉयज (Delivery boys) को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। नए सरकारी प्रस्ताव के अनुसार अब इन श्रमिकों को भी पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सरकारी लाभ दिए जाएंगे।
इन सुविधाओं के लिए शर्त यह होगी कि संबंधित वर्कर ने साल में कम से कम 90 दिन उस प्लेटफॉर्म के लिए काम किया हो। इस कदम का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के लाखों युवाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। इसके लिए एक अलग फंड बनाने की भी योजना है, जिसमें एग्रीगेटर कंपनियों को योगदान देना होगा।
1 करोड़ डिलेवरी बाय को पार्टनर बनाकर हक हड़पते थे
भारत में वर्तमान में लगभग 80 लाख से 1 करोड़ गिग इकोनॉमी से जुड़े हैं, लेकिन कंपनी इन्हें कर्मचारी न मानकर पार्टनर मानती थी, जिससे वे पीएफ और ईएसआई फंड से वंचित थे। लेकिन अब इन डिलीवरी बाय को पेंशन और बीमा की सुविधा के लिए कंपनियों को अपने सालाना टर्नओवर का एक 1 सें 2 प्रतिशत इस फंड में जमा करना होगा। इसके लिए सभी गिग वर्कर्स को ई-श्रम पोर्टल या सरकारी डेटाबेस पर पंजीकरण अनिवार्य होगा।







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